हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए 17 फरवरी को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा की है। यह सत्र केंद्र सरकार द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट यानी RDG बंद करने और प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर बुलाया गया है।
सीएम सुक्खू का कहना है कि इस सत्र का उद्देश्य प्रदेश की जनता को यह बताना है कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पिछले 10 सालों में हिमाचल को क्या दिया है। उन्होंने साफ किया कि RDG ग्रांट 72 वर्षों से निरंतर राज्य को मिल रही थी, लेकिन अब केंद्र ने इसे बंद कर दिया है।
10 हजार करोड़ की RDG पर संकट
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र से मिलने वाली करों की हिस्सेदारी हर साल बढ़ती है, यह सही है। लेकिन केंद्र सरकार ने हिमाचल की 10 हजार करोड़ रुपये सालाना की रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को ही बंद कर दिया है। यह राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बिल्कुल अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने इस फैसले को राज्य के विकास में बड़ी बाधा बताया।
सुक्खू ने कहा कि यह ग्रांट लगातार सात दशक से राज्य को मिलती रही है और इसे अचानक बंद करना प्रदेश के साथ अन्याय है।
BJP नेताओं पर गंभीर आरोप
इस दौरान सीएम सुक्खू ने भाजपा नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विधायक निधि तब दी जाएगी, जब भाजपा नेता राज्य का पैसा रुकवाने के लिए केंद्र के पास नहीं जाएंगे। यह आरोप सीएम सुक्खू और डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री पहले भी कई बार लगा चुके हैं कि हिमाचल के भाजपा नेता दिल्ली जाकर राज्य को केंद्र से मिलने वाली वित्तीय मदद रोकने की कोशिश करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छा होता अगर भाजपा नेता राज्यपाल के पास हिमाचल की RDG को बहाल करने के लिए गए होते। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक स्थिति ठीक होने के बाद विधायक क्षेत्र विकास निधि जारी की जाएगी। यह निधि केवल भाजपा विधायकों की ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के विधायकों की भी रोकी गई है।
भाजपा विधायकों की राज्यपाल से मुलाकात
इससे पहले आज सुबह भाजपा विधायक दल राज्यपाल के पास गया था। भाजपा विधायकों ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर विधायक क्षेत्र विकास निधि और ऐच्छिक निधि को तुरंत बहाल करने के निर्देश देने की मांग की थी।
17 फरवरी को होने वाले विशेष सत्र में राज्य की आर्थिक हालत, केंद्र सरकार की भूमिका और RDG मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है। यह सत्र राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।





