बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री नीना गुप्ता हमेशा से अपनी बेबाक राय और साहसिक जीवन के लिए जानी जाती रही हैं। अब उन्होंने एक बार फिर अपने एक बयान से सबको चौंका दिया है। नीना ने 50 साल की उम्र में दिल्ली के चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक मेहरा से शादी की थी, और अब सालों बाद उन्होंने खुलासा किया है कि इस शादी के पीछे प्यार नहीं, बल्कि एक बड़ी ‘जरूरत’ थी।
साल 2008 में जब नीना गुप्ता ने विवेक मेहरा से शादी की, तो कई लोग हैरान थे। इससे पहले वह लंबे समय तक एक सिंगल मदर के तौर पर अपनी बेटी मसाबा गुप्ता की परवरिश कर रही थीं। हाल ही में शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में उन्होंने इस फैसले पर खुलकर बात की और बताया कि समाज में एक अकेली महिला के लिए सम्मान से जीना कितना मुश्किल होता है।
‘प्यार-व्यार मुझे समझ नहीं आता’
जब पॉडकास्ट में उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने विवेक मेहरा से प्यार में शादी की थी, तो नीना गुप्ता का जवाब सीधा और सपाट था। उन्होंने कहा कि उन्हें प्यार जैसी चीजें ज्यादा समझ नहीं आतीं।
“मुझे प्यार-व्यार समझ नहीं आता। मुझे सिर्फ अपने बच्चे से प्यार समझ आता है। बाकी चीजों को मैं उस नजर से नहीं देखती।” — नीना गुप्ता
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह विषय इतना गहरा है कि वह इस पर भविष्य में एक और किताब लिख सकती हैं, क्योंकि इसका जवाब देना आसान नहीं है।
शादी की वजह थी सामाजिक जरूरत
जब प्यार वजह नहीं थी, तो शादी क्यों की? इस सवाल पर नीना ने बिना किसी लाग-लपेट के जवाब दिया, “ज़रूरत थी बहुत।” उन्होंने स्वीकार किया कि समाज में रहने के लिए आपको उसके कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह सबक उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा है।
नीना गुप्ता ने बताया कि शादी से पहले जब वह कहीं जाती थीं, तो लोग उन्हें अलग और अजीब नजरों से देखते थे। लेकिन शादी का सर्टिफिकेट मिलते ही वही नजरें सम्मान में बदल गईं। उन्होंने कहा, “यह बोलना अच्छा नहीं लगता, लेकिन सच यही है कि शादी कर लो तो सब ठीक हो जाता है।” उनका यह बयान समाज की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है, जहां आज भी एक सिंगल महिला को सम्मान की नजरों से नहीं देखा जाता।
हमेशा चर्चा में रही निजी जिंदगी
नीना गुप्ता की निजी जिंदगी हमेशा से सुर्खियों में रही है। वेस्टइंडीज के पूर्व क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स के साथ उनके रिश्ते से बेटी मसाबा गुप्ता का जन्म हुआ। नीना ने बिना शादी के मां बनने का साहसिक फैसला लिया और मसाबा को एक सिंगल मदर के रूप में पाला। उनके इसी बेबाक और स्वतंत्र रवैये के कारण उनके फैसलों पर हमेशा समाज में बहस होती रही है।






