बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव 16 साल पुराने एक मामले में बुरी तरह फंस गए हैं। मामला इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि कोर्ट ने एक्टर को 4 फरवरी दोपहर 4 बजे तक सरेंडर करने का समय दिया है। दरअसल, ये चेक बाउंस से जुड़ा एक केस है जिसके बारे में कोर्ट का कहना है कि उन्होंने एक्टर को कई अवसर दिए हैं लेकिन हर बार अदालत के भरोसे को तोड़ा गया।
यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट का है, जिसमें बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। उन्हें 4 फरवरी तक संबंधित जेल सुप्रिटेंडेंट के सामने पेश होने के आदेश दिए गए हैं। कोर्ट का कहना है कि एक्टर का व्यवहार निंदनीय है। बार-बार दिए गए आश्वासन के बावजूद भुगतान न करना न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है।
14 साल पुराना है मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये मामला दिल्ली की कंपनी मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। इस कंपनी ने एक्टर की कंपनी को फिल्म बनाने के लिए पैसा दिया था। इसी प्रक्रिया में हुए चेक बाउंस को लेकर कंपनी ने एक्टर पर मुकदमा दर्ज किया है। इस पर कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि चेक बाउंस जैसे मामले में भुगतान को लेकर अदालत को दिए गए आश्वासन का उल्लंघन गंभीर श्रेणी में आता है।
राजपाल ने तोड़ा कोर्ट का भरोसा
इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि एक्टर को कई अवसर दिए गए लेकिन उन्होंने कोर्ट का भरोसा तोड़ दिया। यह मामला 2010 का है, जब एक्टर ने डायरेक्टर के तौर पर अपनी पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाई थी। इस प्रोजेक्ट के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से उन्होंने 5 करोड़ का कर्ज लिया था। फिल्म आर्थिक रूप से सफल नहीं हुई और कर्ज की रकम लौटाने में लगातार देरी होती गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि रकम चुकाने के लिए दिए गए कई चेक बाउंस हो गए। इसके बाद एक्टर और उनसे जुड़ी कंपनी के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत केस दर्ज करवाया गया है।
जेल में भी रहे एक्टर
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजपाल यादव को कई बार नोटिस भेजे लेकिन वह अदालत में पेश नहीं हुए। इसके बाद साल 2013 में उन्हें 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। वो 3 से 6 दिसंबर तक वह जेल में रहे और बाद में दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अपील के आधार पर उनकी सजा निलंबित कर दी थी।
जमा नहीं हुई राशि
निचली अदालत में राजपाल यादव के साथ उनकी पत्नी को भी 6 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। इसमें हस्तक्षेप करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि एक्टर कोई आदतें अपराधी नहीं है और मामले में सुधार और समाधान की गुंजाइश है। इसके बाद इस मामले को मेडिएशन सेंटर भेज दिया गया था। यहां एक्टर ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह शिकायतकर्ता को 2.5 करोड़ का भुगतान करेंगे। इसमें पहली किश्त 40 लाख रुपए और 2.10 करोड रुपए की दूसरी किस्त शामिल थी। अदालत के मुताबिक समय सीमा बीत जाने के बावजूद एक भी किश्त जमा नहीं हुई है।
जनवरी 2026 में कोर्ट में एक्टर को अंतिम मौका दिया था लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया है। एक्टर के इस रवैए को देखते हुए अब जस्टिस ने कहा कि चेक बाउंस मामले में बार-बार किए गए वादों का उल्लंघन गंभीर विषय है। एक्टर को कई मौके दिए गए लेकिन उन्होंने अदालत का भरोसा तोड़ा है। यही कारण है कि उन्हें 4 फरवरी दोपहर 4 बजे तक आत्म समर्पण करने की मोहलत दी गई है। एक्टर के वकील के अनुरोध पर यह राहत दी गई है मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को रखी गई है।





