बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह को ‘कांतारा’ फिल्म के एक किरदार की मिमिक्री से जुड़े विवाद में फिलहाल राहत नहीं मिली है। उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर मंगलवार (24 मार्च) को कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को सुना और अगली तारीख 10 अप्रैल तय कर दी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सार्वजनिक हस्तियों को उनके आचरण और बयानों को लेकर अधिक सतर्क रहने की सलाह दी। जस्टिस नागप्रसन्ना ने टिप्पणी की कि जिनकी समाज में एक पहचान है, उन्हें बोलते समय ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि उनकी बातों का व्यापक असर होता है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि आपत्तियां दर्ज करने में देरी क्यों हुई।

क्या था पूरा मिमिक्री विवाद?

यह मामला पिछले साल गोवा में आयोजित हुए भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) से जुड़ा है। मंच पर एक कार्यक्रम के दौरान रणवीर सिंह ने ऋषभ शेट्टी की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कांतारा’ में दिखाए गए ‘दैव’ के किरदार से प्रेरित एक दृश्य की नकल की थी। उनके इस एक्ट के बाद सोशल मीडिया पर और कुछ स्थानीय धार्मिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई।

लोगों का आरोप था कि रणवीर सिंह ने भगवान पंजुरली (कांतारा में दिखाए गए दैवीय चरित्र) और स्थानीय आस्था का अपमान किया है। इस कृत्य को लेकर कर्नाटक में कई जगहों पर उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिसके आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज की थी। इन्हीं FIR को खारिज करवाने के लिए रणवीर सिंह ने कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

शिकायतकर्ता ने माफी को बताया ‘बनावटी’

विवाद बढ़ने के बाद रणवीर सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील प्रशांत मेथल ने इस माफी की प्रामाणिकता पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने दलील दी कि यह माफी सच्ची नहीं है।

“रणवीर सिंह की माफी दिल से मांगी गई माफी नहीं थी… क्योंकि उन्होंने अपनी माफी उस हैंडल से ट्वीट की है, जिसे उनके मैनेजर चलाते हैं…” — प्रशांत मेथल, शिकायतकर्ता के वकील

अदालत की टिप्पणियों से ऐसा प्रतीत हुआ कि वह रणवीर की माफी को स्वीकार करने पर विचार कर सकती है, लेकिन शिकायतकर्ता पक्ष की दलीलों के बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया गया। अब सभी की निगाहें 10 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।