चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आज रतलाम शहर एक बार फिर भक्ति और आस्था के रंग में रंगने जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी गढ़खंखई माताजी चुनरी यात्रा का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसका यह 26वां वर्ष है।
यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और एकता का प्रतीक बन चुकी है। हजारों भक्त आज शाम एक साथ 111 फीट लंबी चुनरी लेकर पैदल यात्रा पर निकलेंगे और माता के दरबार तक पहुंचकर अपनी आस्था अर्पित करेंगे।
111 फीट चुनरी के साथ शुरू होगी यात्रा
आज 25 मार्च, बुधवार को शाम 6 बजे श्री पद्मावती माता मंदिर, महलवाड़ा से इस चुनरी यात्रा की शुरुआत होगी। यहां से श्रद्धालु 111 फीट लंबी चुनरी को अपने हाथों में लेकर यात्रा प्रारंभ करेंगे।
यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी, जिनमें पैलेस रोड, डालूमोदी बाजार, माणक चौक, घांस बाजार, चौमुखी पुल, चांदनी चौक, सुतारों का वास, बाजना बस स्टैंड और सागोद रोड जैसे इलाके शामिल हैं। शहरभर में इस यात्रा को लेकर खास तैयारियां की गई हैं और जगह-जगह भक्तों के स्वागत के लिए भी इंतजाम किए गए हैं।
करीब 40 किलोमीटर की पैदल यात्रा, सुबह पहुंचेगी मंदिर
यह चुनरी यात्रा लगभग 39 से 40 किलोमीटर का लंबा सफर तय करेगी। पूरी रात चलने वाली यह पदयात्रा अगले दिन सुबह करीब 6 बजे गढ़खंखई माताजी मंदिर, राजापुरा पहुंचेगी।
मंदिर पहुंचकर भक्तगण माता रानी को चुनरी अर्पित करेंगे और अपनी मनोकामनाएं मांगेंगे। यह पल यात्रा का सबसे खास और भावुक क्षण होता है, जब हजारों श्रद्धालु एक साथ माता के दरबार में पहुंचते हैं। हर साल इस यात्रा में शामिल होने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो इसकी लोकप्रियता और श्रद्धा का प्रमाण है।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक संदेश
इस वर्ष की चुनरी यात्रा को खास उद्देश्य के साथ जोड़ा गया है। आयोजन समिति के अनुसार, यह यात्रा ‘हिंदू राष्ट्र’ की कामना को समर्पित है। इस तरह के आयोजनों के जरिए समाज में एकता, धार्मिक जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है। भक्त न सिर्फ अपनी आस्था के लिए बल्कि समाज और देश की खुशहाली की कामना लेकर भी इस यात्रा में शामिल होते हैं।
आयोजन समिति ने की अपील
गढ़खंखई माताजी चुनरी यात्रा आयोजन समिति के संयोजक जनक नागल, अध्यक्ष धर्मेंद्र रांका और अन्य पदाधिकारियों ने सभी धर्मप्रेमी लोगों से अपील की है कि वे इस पावन यात्रा में अपने परिवार और मित्रों के साथ शामिल हों। उन्होंने कहा कि यह यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था का एक बड़ा आयोजन है, जिसमें शामिल होकर हर व्यक्ति आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त कर सकता है।






