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6 साल बाद रिया चक्रवर्ती को राहत! कोर्ट ने NCB को लगाई फटकार, खाते डीफ्रीज करने का आदेश

Written by:Bhawna Choubey
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रिया चक्रवर्ती केस में 6 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। बैंक अकाउंट्स डीफ्रीज करने का आदेश देते हुए NCB की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए, जिससे केस को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
6 साल बाद रिया चक्रवर्ती को राहत! कोर्ट ने NCB को लगाई फटकार, खाते डीफ्रीज करने का आदेश

करीब छह साल से सुर्खियों में रहे रिया चक्रवर्ती केस में अब एक अहम मोड़ आया है। एक समय ऐसा था जब यह मामला पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना हुआ था और हर अपडेट पर लोगों की नजर रहती थी। अब इसी केस में कोर्ट का ताजा फैसला सामने आया है, जिसने एक बार फिर बहस को तेज कर दिया है।

रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक चक्रवर्ती को बड़ी राहत देते हुए कोर्ट ने उनके बैंक अकाउंट्स डीफ्रीज करने का आदेश दिया है। यह फैसला न सिर्फ उनके लिए राहत लेकर आया है, बल्कि जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।

रिया चक्रवर्ती केस का क्या है पूरा मामला

रिया चक्रवर्ती केस की शुरुआत साल 2020 में हुई थी, जब सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद कई तरह की जांच शुरू हुई थीं। इस दौरान ड्रग्स एंगल सामने आया और NCB ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए रिया और उनके भाई को गिरफ्तार किया था।

जांच के दौरान दोनों के बैंक अकाउंट्स भी सीज कर दिए गए थे। उस समय यह कदम जांच का हिस्सा माना गया, लेकिन अब कोर्ट ने उसी कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। रिया चक्रवर्ती केस में यह फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह बताता है कि जांच के दौरान कानून के नियमों का पालन कितना जरूरी होता है।

NCB की प्रक्रिया पर उठे सवाल

रिया चक्रवर्ती केस में कोर्ट ने साफ कहा कि NCB जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करने में असफल रही। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि अकाउंट्स फ्रीज करने के दौरान NDPS एक्ट 1985 के सेक्शन 68F का पालन नहीं किया गया। तय समय के भीतर जरूरी मंजूरी नहीं ली गई, जिससे यह कार्रवाई कानून के मुताबिक सही नहीं मानी जा सकती।

कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि समय सीमा के भीतर सही आदेश जारी न होना एक बड़ी चूक है। यही वजह रही कि अकाउंट्स को फ्रीज करना गलत माना गया और उन्हें डीफ्रीज करने का आदेश दिया गया। रिया चक्रवर्ती केस में यह टिप्पणी जांच एजेंसियों के लिए भी एक सख्त संदेश मानी जा रही है।

सरकारी पक्ष की दलील और कोर्ट का फैसला

रिया चक्रवर्ती केस में सरकारी पक्ष ने अकाउंट्स डीफ्रीज करने का विरोध किया था। उन्होंने रिया के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई के पर्याप्त कारण थे।

लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना। अदालत का कहना था कि कानूनी प्रक्रिया का पालन सबसे जरूरी है और अगर उसमें कमी रह जाती है, तो कार्रवाई वैध नहीं मानी जा सकती। इस फैसले के बाद रिया चक्रवर्ती केस एक बार फिर चर्चा में आ गया है और लोगों के बीच नए सवाल खड़े हो गए हैं।

2020 की गिरफ्तारी और आगे की घटनाएं

रिया चक्रवर्ती केस में साल 2020 में गिरफ्तारी के बाद उन्हें करीब 28 दिन जेल में बिताने पड़े थे। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी, लेकिन केस से जुड़ी जांच और कानूनी प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रही। इस दौरान यह मामला मीडिया और सोशल मीडिया दोनों पर लगातार चर्चा में रहा। अब 2026 में आए इस फैसले ने एक बार फिर पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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