Hindi News

श्रेया घोषाल का इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री को लेकर बड़ा बयान, कहा – ‘महिलाओं को कम मौका मिल रहा’

Written by:Rishabh Namdev
Published:
गायिका श्रेया घोषाल ने इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री में महिलाओं की घटती मौजूदगी पर चिंता जताई है। राज शमानी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत के टॉप म्यूजिक चार्ट्स में फीमेल सिंगर्स के गाने बहुत कम दिखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले करीब दस साल में इंडस्ट्री का ढांचा बदला है और महिला आवाजों का प्रतिनिधित्व कमजोर हुआ है।
श्रेया घोषाल का इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री को लेकर बड़ा बयान, कहा – ‘महिलाओं को कम मौका मिल रहा’

इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री में महिला गायिकाओं की हिस्सेदारी को लेकर श्रेया घोषाल का नया बयान चर्चा में है। हालिया इंटरव्यू में उन्होंने सीधे कहा कि लोकप्रिय चार्ट्स में फीमेल सिंगर्स की मौजूदगी अपेक्षाकृत कम होती जा रही है। उनका तर्क सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि चार्ट आधारित है—और यही वजह है कि यह टिप्पणी संगीत जगत में बहस का विषय बनी है।

श्रेया घोषाल ने पुरुष और महिला कलाकारों के प्रतिनिधित्व का फर्क समझाते हुए अंतरराष्ट्रीय चार्ट्स का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल म्यूजिक स्पेस में टेलर स्विफ्ट और रिहाना जैसी कलाकार लगातार शीर्ष पर दिखती हैं, जबकि भारत में वैसी नियमित दृश्यता कम मिलती है।

टॉप 10 नहीं, टॉप 50 में भी कम महिला आवाजें

राज शमानी के साथ बातचीत में श्रेया ने भारतीय चार्ट्स की तस्वीर पर विस्तार से बात की। उनके मुताबिक, टॉप पोजिशन पर महिला आवाजों की संख्या बहुत सीमित रह जाती है और यह ट्रेंड पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा साफ दिखा है।

“टॉप 10 की बात छोड़ दीजिए, टॉप 50 गानों में भी मुश्किल से 6 या 7 गाने ऐसे होते हैं जिन्हें फीमेल सिंगर्स ने गाया हो।” — श्रेया घोषाल

उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा इशारा करता है कि महिलाओं को पहले जैसा अवसर नहीं मिल रहा। उनके अनुसार, यह स्थिति अचानक नहीं बनी, बल्कि धीरे-धीरे विकसित हुई है और अब स्पष्ट रूप से नजर आती है।

पिछले करीब दस साल का बदलाव और इंडस्ट्री की दिशा

श्रेया घोषाल ने इस मुद्दे को बड़े उद्योगगत बदलावों से जोड़कर भी देखा। उन्होंने कहा कि पिछले करीब एक दशक में संगीत के कई नए स्टाइल सामने आए, फ्यूजन बढ़ा, प्रोडक्शन पैटर्न बदले और रिलीज की रणनीतियां भी बदल गईं। इस दौर में प्रयोग तो हुए, लेकिन प्रतिनिधित्व का संतुलन हर जगह एक जैसा नहीं रहा।

उनका कहना था कि इंडस्ट्री फिलहाल ट्रांजिशन में है। नए साउंड और नए फॉर्मेट्स के बीच एक तरह की उलझन भी दिखाई देती है, लेकिन उन्होंने यह उम्मीद जताई कि समय के साथ यह स्थिति संतुलित होगी और महिला गायिकाओं की हिस्सेदारी फिर मजबूत दिखेगी।

लता मंगेशकर-आशा भोसले का दौर क्यों बना संदर्भ

अपने तर्क को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य देने के लिए श्रेया ने लता मंगेशकर और आशा भोसले का उदाहरण रखा। उन्होंने कहा कि उस समय इन दोनों गायिकाओं का प्रभाव इतना गहरा था कि कई मौकों पर उनकी लोकप्रियता बड़े पुरुष गायकों के बराबर या उससे आगे दिखती थी। हर साल उनके कई गाने रिलीज होते थे और महिला आवाजों को मुख्यधारा में लगातार जगह मिलती थी।

श्रेया के इस संदर्भ का केंद्रीय बिंदु यही रहा कि महिला प्रतिभा की कमी नहीं है, सवाल अवसर और दृश्यता का है। उनके बयान से यह भी सामने आता है कि मौजूदा बदलाव को केवल शैलीगत परिवर्तन की तरह नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व के सवाल के रूप में भी देखा जा रहा है।

फिलहाल, उनकी टिप्पणी इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए एक जरूरी संकेत की तरह देखी जा रही है—जहां चार्ट प्रदर्शन, प्लेलिस्ट संस्कृति और रिलीज इकोसिस्टम के बीच यह प्रश्न फिर उभरा है कि क्या महिला आवाजों को बराबर स्पेस मिल रहा है। आने वाले समय में चार्ट्स में यह बदलाव दिखता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।

मध्य प्रदेश से जुड़ी विश्वसनीय और ताज़ा खबरें MP Breaking News in Hindi यहां आपको मिलती है MP News के साथ साथ लगातार अपडेट, राजनीति, अपराध, मौसम और स्थानीय घटनाओं की सटीक जानकारी। भरोसेमंद खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें और अपडेटेड रहें !
Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
Follow Us :GoogleNews