आज रविवार पूर्णिमा को साल का दूसरा चन्द्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा ऐसे में सूतक काल भी मान्य होगा। खास बात ये है कि आज से पितृपक्ष की भी शुरुआत हो रही है, ऐसे में पितृपक्ष में ग्रहण लगने का बड़ा महत्व माना जा रहा है। भारत के साथ ही यह ग्रहण फ्रांस, इग्लैंड,जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, न्यूजीलैंड, अमेरिका और अफ्रीका में भी दिखाई देगा। इससे पहले साल का पहला चन्द्र ग्रहण 14 मार्च होली पर लगा था।हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया था और ना ही सूतक काल मान्य हुआ था ।
चन्द्र ग्रहण-सूतककाल का समय
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भारतीय समयानुसार आंशिक ग्रहण का आरंभ रात्रि 09 बजकर 57 मिनिट 09 सेकंड से होगा । इसके बाद रात्रि 11 बजकर 48 सेकंड की स्थिति में पूर्णचंद्रग्रहण दिखना आरंभ होगा । यह पूर्णग्रहण की स्थिति रात्रि 12 बजकर 22 मिनिट 51 सेकंड तक रहेगी । इसके बाद पुन: आंशिक ग्रहण चलता रहेगा जो कि रात्रि 01 बजकर 26 मिनिट 31 सेकंड पर समाप्त होगा ।सूतककाल दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 08 सितंबर को देर रात 01 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।
3 साल बाद सबसे लंबी अवधि का चन्द्र ग्रहण
नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि सन 2022 के बाद सबसे लंबी अवधि का चंद्रग्रहण आज रविवार को लगने जा रहा है। इस खगोलीय घटना में पूर्ण ग्रहण अवधि या टोटेलिटी डयूरेशन लगभग 1 घंटा 22 मिनिट रहेगा, जबकि सन 2022 में हुये चंद्रग्रहण की पूर्णता अवधि 1 घंटा 25 मिनिट थी । इस तरह यह 2022 के बाद सबसे लंबी अवधि का पूर्णचंद्रग्रहण है ।खास बात यह है कि इसे देखने के लिये किसी विशेष यंत्र जैसे टेलिस्कोप या ग्रहण के चश्मे की जरूरत नहीं होगी । खाली आंखो से ही इसे देखा जा सकता है । भारत के साथ ही आस्ट्रेलिया, एशिया अफ्रीका और यूरोप सहित विश्व की लगभग 85 आबादी देख पायेगी ।
आसमान में दिखेगा ब्लड मून का नजारा
सारिका घारू ने बताया पृथ्वी के बीच में आ जाने से सूर्य की रोशनी सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती है इससे चंद्रग्रहण की स्थिति बनती है । इस समय पृथ्वी की वायुमंडलीय परतों में से गुजरते हुए लाल तरंगें चंद्रमा तक पहुंचती हैं जिससे चंद्रमा लाल तामिया दिखता है ,इस रंग के कारण इसे ब्लड मून भी कहा जाता है ।
जानिए कब लगता है चन्द्र ग्रहण?
चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है, इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है।पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के बिल्कुल सीध में होते हैं। इस दौरान जब हम धरती से चांद देखते हैं तो वह हमें काला नजर आता है और इसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।
राशियों पर कैसा रहेगा चन्द्र ग्रहण का प्रभाव?
यह ग्रहण शनि की राशि कुंभ और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में घटित होगाा।इस दौरान राहु चंद्रमा भी कुंभ में रहेंगे।ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह चंद्र ग्रहण मेष, वृष, मकर, कुंभ, कन्या और धनु राशि के जातकों के लिए शुभ साबित हो सकता है। इन लोगों को आकस्मिक धनलाभ,वाहन या प्रापर्टी क्रय विक्रय, आय में वृद्धि और नौकरीपेशा को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं मिथुन, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक और मीन को संभलकर रहने की जरूरत है। सेहत पर बुरा प्रभाव, धनहानि और मानसिक तनाव और नौकरीपेशा को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं?
- ग्रहण के सूतक काल में पूजा पाठ बंद कर देना चाहिए।
- ग्रहण के अवधि के दौरान घर के पूजा वाले स्थान को पर्दे से ढक दें।
- ग्रहण में भूलकर भी देवी-देवताओं की पूजा नहीं करना चाहिए।
- ग्रहण के दौरान खाना-पीना नही चाहिए।
- खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए
- ग्रहण की समाप्ति के बाद घर और पूजा स्थल को गंगाजल का छिड़काव करके शुद्ध करना चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, उन्हें घर से
बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण देखना चाहिए। - ग्रहण के सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, सोना, बाल काटना, तेल लगाना,
सिलाई-कढ़ाई करना और चाकू चलाना नहीं चाहिए।
(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)