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प्याज-लहसुन ने तोड़ा 23 साल पुराना रिश्ता, पति-पत्नी के तलाक की कहानी कर देगी हैरान

Written by:Atul Saxena
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पत्नी स्वामीनारायण संप्रदाय की अनुयायी है। वो प्याज और लहसुन के सेवन से पूरी तरह परहेज करती थीं। वहीं, पति और ससुराल पक्ष पर ऐसी कोई धार्मिक या आहार संबंधी पाबंदी नहीं थी और यही तलाक की मुख्य वजह बनी।
प्याज-लहसुन ने तोड़ा 23 साल पुराना रिश्ता, पति-पत्नी के तलाक की कहानी कर देगी हैरान

पति पत्नी के रिश्ते को पवित्र माना जाता है, विवाह के बंधन में बंधते समय धार्मिक रीति रिवाजों के अनुरूप अपने आराध्य की उपस्थिति में जीवन भर एक दूसरे का साथ निभाने के वचन दिए जाते हैं लेकिन अब ये वचन और वादे कब टूट जाते है और किस बात पर टूट जाते हैं ये कहना बहुत मुश्किल है, एक गुजराती पति पत्नी एक तलाक की कहानी भी कुछ ऐसी ही है जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

गुजरात के अहमदाबाद से पति-पत्नी के बीच तलाक का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। इनके तलाक की वजह कोई विवाह पूर्व संबंध, विवाहेत्तर संबंध, लड़ाई झगड़ा आदि नहीं था बल्कि इनके तलाक की वजह जीभ का स्वाद था, इनके तलाक की वजह थी प्याज लहसुन, 12 साल तक मामला अदालत में चला, समझाने के बहुत प्रयास हुए लेकिन अंत में गुजरात हाई कोर्ट ने तलाक की अर्जी पर मुहर लगा दी।

जिद के आगे हार गया रिश्ता, टूट गई  23 साल पुरानी शादी   

प्याज और लहसुन की वजह से आखिरकार गुजरात के अहमदाबाद के एक दंपती ने अपनी 23 साल पुरानी  शादी खत्म कर ली,  पति-पत्नी ने लगभग 12 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी, इस दौरान काउंसलिंग से लेकर फैमिली कोर्ट और फिर हाई कोर्ट तक मामला चलता रहा, कई बार समझौते की कोशिशें हुईं, लेकिन दोनों अपनी-अपनी जिद पर अड़े रहे फिर अंत में गुजरात हाई कोर्ट ने तलाक को मंजूरी देते हुए इस शादी को खत्म करने का फैसला सुना दिया है।

धार्मिक मान्यता वैवाहिक जीवन में बन गई बेड़ियाँ, टूट गई शादी 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अहमदाबाद में रहने वाले इस दंपत्ति का विवाह 2002 में हुआ था, शादी के बाद शुरुआती कुछ वर्षों तक संबंध सामान्य रहे, लेकिन पत्नी के धार्मिक मान्यताओं ने धीरे-धीरे विवाद को जन्म देना शुरू कर दिया,  पत्नी स्वामीनारायण संप्रदाय को मानती थी इसलिए संप्रदाय के सिद्धांतों के चलते वह प्याज और लहसुन नहीं खाती थी लेकिन इससे उलट पति और उसका परिवार प्याज-लहसुन खाता था उनके यहाँ इसके इस्तेमाल पर कोई पाबंदी नहीं थी बल्कि नियमित रूप से उनके घर एक खाने में खाना प्याज लहसुन के प्रयोग होता था।

पत्नी बोली घर में प्याज लहसुन नहीं आएगा, पति ने कहा असंभव 

पति पत्नी के बीच प्याज लहसुन के उपयोग पर विवाद होने लगा जो धीरे धीरे झगड़े में बदलने लगा, इससे उनका वैवाहिक जीवन और घर का माहौल दोनों प्रभावित होने लगे,  स्थिति ये हो गई पत्नी ने कह दिया कि घर में प्याज लहसुन नहीं आएगा, पति को अपनी पत्नी की मांग अव्यावहारिक लगी और उसने इससे इंकार कर दिया। स्वाद की इस लड़ाई ने धीरे धीरे बड़ा रूप ले लिया, घर के बड़ों ने बीच का रास्ता निकालते हुए एक घर में दो किचिन कर दिए लेकिन यहाँ भी मामला संभला नहीं बल्कि पति पत्नी के बीच की दूरियाँ बढ़ती गई और घर का माहौल बिगड़ता चला गया, इस दौरान पत्नी अपने बेटे को लेकर मायके चली गई।

11 साल चला फ़ैमिली कोर्ट में प्रकरण, 2024 में आया फैसला   

समझाने के बाद भी जब पत्नी वापस नहीं लौटी तो पति ने 2013 में पति ने अहमदाबाद की फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी,  पति ने आरोप लगाया कि पत्नी ने उसके साथ क्रूरता की है और वो बिना उचित कारण घर छोड़कर चली गई,  लगभग 11 साल तक चले मुकदमे के बाद फैमिली कोर्ट ने 8 मई 2024 को फैसला सुनाते हुए पति की तलाक याचिका मंजूर कर ली साथ ही अदालत ने पति को पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण के लिए राशि देने का आदेश भी दिया।

पत्नी के बयान के बाद हाई कोर्ट ने दे दी तलाक की मंजूरी  

फैमिली कोर्ट के फैसले के बाद भी मामला नहीं सुलझा, भरण-पोषण की राशि के आदेश से असंतुष्ट पति ने  गुजरात हाई कोर्ट में अपील दाखिल की, पत्नी ने भी फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अर्जी लगा दी,  हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान मामला उस समय अलग मोड़ पर पहुंच गया जब पत्नी ने अदालत में कहा कि वो शादी तोड़ना चाहती है उसे कोई आपत्ति नहीं है। पत्नी की बात सुनने के बाद जस्टिस संगीता विशेन और जस्टिस नीशा ठाकोर की बेंच ने कहा कि चूंकि दोनों पक्ष तलाक पर सहमत हैं, इसलिए तलाक से जुड़े मुद्दे पर आगे विचार की आवश्यकता नहीं है,अदालत ने फैमिली कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का अंत कर दिया, लेकिन ये मामला अब मीडिया की सुर्खियां बना हुआ है, पति पत्नी की निजता का सम्मान करते हुए यहाँ इनके नाम का उल्लेख नहीं कर रहे हैं।

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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