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गुना में गंदे पानी का कहर: 10 से ज्यादा बच्चे बीमार, 4 महीने से नहीं साफ हुई थी टंकी

Written by:Bhawna Choubey
Published:
गुना में दूषित पानी की सप्लाई ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बूढ़े बालाजी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में 10 से ज्यादा बच्चे उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल पहुंचे। सामने आया है कि इलाके की पानी की टंकी करीब चार महीने से साफ नहीं हुई थी, जबकि कई जगह पाइपलाइन भी लीकेज बताई जा रही है।

गुना शहर में पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के कुछ इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई के बाद बच्चों के बीमार पड़ने की घटनाएं सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। अब जब कई बच्चे अस्पताल पहुंच गए हैं, तब प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली चर्चा में है।

मिली जानकारी के अनुसार, बूढ़े बालाजी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में पिछले करीब दो सप्ताह से पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। इसी दौरान 3 से 12 साल की उम्र के कई बच्चों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दिए। बच्चों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया। डॉक्टरों ने भी शुरुआती तौर पर दूषित पानी को बीमारी की संभावित वजह माना है।

दूषित पानी की सप्लाई और लीकेज पाइपलाइन बनी चिंता का कारण

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि इलाके की कई पेयजल पाइपलाइन पुरानी हो चुकी हैं और कई जगहों पर उनमें लीकेज है। लोगों के अनुसार, बरसात और नालियों के आसपास जमा गंदा पानी इन पाइपों के जरिए सप्लाई लाइन में मिल सकता है। इससे घरों तक पहुंचने वाला पानी साफ नहीं रह पाता। यही वजह है कि लगातार शिकायतों के बावजूद लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब यह जानकारी सामने आई कि क्षेत्र की पानी की टंकी की सफाई करीब चार महीने से नहीं हुई थी। सामान्य तौर पर टंकियों की नियमित सफाई जरूरी मानी जाती है ताकि पानी में बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्व न पनपें। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी समस्या की पुष्टि करते हुए संबंधित विभागों से तुरंत सुधार कार्य शुरू करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर निगरानी और रखरखाव होता, तो बच्चों की तबीयत बिगड़ने जैसी स्थिति शायद नहीं बनती।

पेयजल जांच शुरू, स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड पर

घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने सक्रियता दिखाई है। नगरपालिका की ओर से प्रभावित वार्डों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। साथ ही क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को ठीक करने का काम भी शुरू किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी तथा जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।

दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल पहुंचे कुछ बच्चों में पीलिया जैसे लक्षण भी दिखाई दिए थे, हालांकि फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी और मानसून के बीच का समय जलजनित बीमारियों के लिए संवेदनशील होता है। ऐसे में साफ पेयजल, टंकियों की नियमित सफाई और पाइपलाइन की निगरानी बेहद जरूरी है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शहरों की पेयजल व्यवस्था की नियमित निगरानी कितनी जरूरी है। लोगों की मांग है कि केवल जांच तक सीमित रहने के बजाय जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। फिलहाल पूरे शहर की नजर पानी की जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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