मंदिरों के सामने बैठे भिखारियों को पहुंचाया अटल रैन बसेरा

मंदिरों के सामने बैठे भिखारियों को पहुंचाया अटल रैन बसेरा

ग्वालियर। अतुल सक्सेना।

कोरोना वायरस के संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए घोषित किये गए 21 दिन के लॉक डाउन में लोगों से घरों में रहने की अपील प्रधानमंत्री ने की है जिसे बाद प्रदेश सरकार एवं स्थानीय प्रशासन लोगों को हर के अंदर रहने का निवेदन कर रही है लेकिन इसमें वो गरीब वर्ग परेशान है जिसके पास खुद का घर नहीं है। सबसे अधिक परेशानी भिखारियों की है जो मंदिरों के बाहर सड़क पर ही रहते हैं लेकिन इन दिनों मंदिरों में ताले लटके होने के कारण इनके भोजन की भी समस्या पैदा हो गई है। इसीलिए लॉक डाउन का पालन कराने और भिखारियों के भोजन आदि की व्यवस्था को देखते एसडीएम लश्कर सीबी प्रसाद के निर्देशन में पुलिस प्रशासन के सहयोग से नगर निगम निरीक्षक श्रीकान्त सेन के नेतृत्व में मदाखलत दक्षिण के अमले द्वारा महाराज बाड़ा हनुमान मंदिर के पास सड़क पर बैठे बेसहारा भिखारियों को मदाखलत वाहन में बैठाकर अटल रैन बसेरा कम्पू आरटीओ ऑफिस के पास भिजवाया गया। खास बात ये रही कि जिन लोगों ने काम किया उनका कहना था कि आज हमने कर्तव्य के साथ साथ ये पुण्य का काम किया है उसके बाद मन को बहुत सुकून मिला है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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