सीहोर। अनुराग शर्मा।
झाबुवा का एक परिवार जो पिछले 3 महीनों से भोपाल में मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहा था। लॉक डाउन होते ही परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। पहले लॉक डाउन ओर फिर भोपाल में कर्फ्यू के चलते परिवार पर रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया। मजबूरी में परिवार में पलायन करने का फैसला लिया, पर अब ओर भी गंभीर संकट परिवार के समाने आ गया परिवहन के तमान रास्ते बंद होने के कारण परिवार में पैदल भोपाल से झाबुवा जाने का निर्णय लिया।
ये परिवार आज पैदल सफर करते सीहोर पहुचा। जहाँ मीडिया की नजर इन पर पड़ी और पूछताछ पर परिवार के मुखिया ने अपनी दास्तां सुनाई। मीडिया कर्मियों ने परिवार को भोजन उपलब्ध करवाया और आगे आष्टा तक भोजन की जावाबदारी भी ली। देशबन्दी के कारण आज इनके जैसे हजारों लोगों के समाने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
लॉकडाउन की सबसे ज्यादा मार गरीबों पर, भोपाल से झाबुआ पैदल जा रहा मजदूर परिवार
Written by:Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






