ग्वालियर में आज भी जीवित है शाही परंपरा, “महाराज” ज्योतिरादित्य सिंधिया के शमी के वृक्ष में तलवार लगाते पत्तियां लूटने दौड़े लोग

दशहरा पार्क में केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने शमी पूजन किया, पिता के साथ महान आर्यमन सिंधिया भी परंपरा अनुसार "राजसी पोशाक" में नजर आये ।
Dussehra 2026 Jyotiraditya Scindia Shami Pujan

Dussehra 2026 Jyotiraditya Scindia Shami Pujan

विजयादशमी यानि दशहरे का पर्व आज पूरे देश में जोश, उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है, रामलीला मंचन के अंतिम दिन रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित हो रहा है ग्वालियर में इस तरह के आयोजन हो रहे हैं लेकिन सबसे अलग ग्वालियर में शमी पूजन की शाही परंपरा भी निभाई गई, सिंधिया राजवंश प्रमुख केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने परिवार की परंपरा को निभाते हुए शमी के वृक्ष का पूजन किया और शहरवासियों को दशहरे की शुभकामनायें दी।

देश मे भले ही रियासतें समाप्त हो गई हों आज भी कई शहर ऐसे हैं जहाँ शाही परम्पराएँ आज भी निभाई जाती हैं, इसका उदाहरण है ग्वालियर और “सिंधिया राजवंश” जहां केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजसी पोशाक में विजयादशमी- दशहरे के मौके पर शमी पूजन किया और अपने महल में राजशाही अंदाज में दरबार भी लगाया और सभी को दशहरे की शुभकामनाएं दीं।

ग्वालियर में मांढरे की माता मंदिर के नीचे स्थित दशहरा पार्क में सिंधिया राजवंश के प्रमुख महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया  परंपरागत वेशभूषा, राजसी पोशाक में “शमी पूजन” स्थल पहुंचे और मराठा सरदार और शहर के प्रबुद्ध लोगों से मिलने के बाद उस चबूतरे पर पहुंचे जहाँ शमी का वृक्ष था, राजपुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन कराया।

सिंधिया ने शमी के वृक्ष को लगाई तलवार, सोना लूटने दौड़े लोग 

पूजन के बाद मंत्रोच्चार के बीच  जैसे ही केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने तलवार की नोक शमी के वृक्ष पर लगाई तभी वहां मौजूद शहर की जनता और मराठा सरदारों के वंशजों ने शमी की पत्तियों को लूट लिया, सिंधिया ने इस अवसर पर शहरवासियों को दशहरे की शुभकामनायें देते हुए कहा कि ये शमी की पत्तियां जिसे सोने की पत्तियां माना जाता है जो समृद्धि का प्रतीक हैं ये आपके जीवन में सुख समृद्धि लाये यही कामना है।

ये कथाएं हैं प्रचलित 

आपको बता दें शमी के वृक्ष की पत्तियों को “सोने का प्रतीक” माना जाता है यह परंपरा सदियों पुरानी रियासतकालीन विरासत का हिस्सा है जिसे राजा बलि द्वारा प्रजा को स्वर्ण मुद्राएं लुटाने की कथा से भी जोड़ा जाता है। शमी पूजन के पीछे भी कई कथाएं प्रचलित है , कहा जाता है कि पांडव जब अज्ञातवास से लौटकर आये थे तो उन्होंने अपने शस्त्र शमी के पेड़ पर ही रखे तह जिसके बाद उन्होंने युद्ध में विजय प्राप्त की। प्रभु श्री राम ने भी लंका विजय से पहले शमी के वृक्ष की ही पूजा की थी ।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
Follow Us :GoogleNews
ग्वालियर में आज भी जीवित है शाही परंपरा, "महाराज" ज्योतिरादित्य सिंधिया के शमी के वृक्ष में तलवार लगाते पत्तियां लूटने दौड़े लोग