ग्वालियर जिला प्रशासन ने स्कूली बच्चों और उनके परिजनों को परेशानी से बचाने के उद्देश्य से एक ही स्थान पर किताबें उपलब्ध कराने की जो प्लानिंग की थी वो दिखावा साबित हो रही है, पुस्तक मेला बदइंतजामी और मनमानी का पुस्तक मेला साबित हो रहा है, दुकानदार कई गुना महंगी कीमतों पर किताबें बेच रहे हैं और जिला प्रशासन के आदेश को ठेंगा दिखा रहे हैं, कुछ दुकानदार तो ओवरलैप कर महंगी कीमत पर किताबें बेच रहे है, हालाँकि परिजनों की शिकायत के बाद एक दुकानदार और एक स्कूल संचालक के विरुद्ध जिला प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कराई है।
ग्वालियर व्यापार मेला स्थित शिल्प बाजार में जिला कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर 25 अप्रैल से 3 अप्रैल तक 10 दिवसीय पुस्तक मेला का आयोजन किया गया हैं, परिजनों को परेशानी से बचाने के उद्देश्य से हर साल की तरह इस साल भी पुस्तक मेला आयोजित किया जा रहा है लेकिन यहाँ पहुंच रहे परिजन मेले की अव्यवस्था और दुकानदारों की मनमानी के सामने ठगा महसूस कर रहे हैं। पुस्तक मेले में NCERT की किताबें तो उचित मूल्य पर मिल रही हैं लेकिन निजी प्रकाशकों की किताबों की कीमत पर किसी का नियंत्रण नहीं है, यहाँ प्रकाशक, दुकानदार और स्कूल प्रबंधन का गठजोड़ साफ़ दिखाई दे रहे हैं ये किताबें कई गुना महंगी कीमत पर बेची जा रही हैं जिनपर मात्र 10 प्रतिशत डिस्काउंट दिया जा रहा है।
आदर्श स्टेशनरी एवं कंगारू किड्स स्कूल के संचालक पर एफआईआर दर्ज
पुस्तक मेले में परिजनों को तगड़ा झटका तब लगा जब उन्होंने शक होने पर खरीदी गई किताबों के बार कोड को थिनर से साफ़ किया तो उनकी आँखें खुली रह गई, आदर्श स्टेशनरी, अंकित सेल्स सहित कुछ और दुकानों से खरीदी गई किताबों के ऊपर ज्यादा कीमत लिखी थी जबकि उसे मिटाने पर नीचे कम कीमत लिखी थी मतलब साफ़ है कि ओवरलैप कर ज्यादा कीमत लिखी गई, हालाँकि दुकानदारों ने इस पर सफाई दी कि ये प्रकाशक ने ही ऐसी भेजी हैं हम इसमें क्या कर सकते हैं, लेकिन प्रशासन ने दुकानों को नोटिस थमाया है, इतना ही नहीं कुछ किताबें ऐसी भी मिल रही हैं जिनपर एमआरपी ही नहीं लिखी गई और दुकानदार मनमाने रेट में बेच रहा है शिकायतों के बाद प्रशासन ने आदर्श स्टेशनरी और कंगारू किडस स्कूल के संचालकों के विरुद्ध गोले का मंदिर थाने में शिकायत दर्ज कराई है और दुकान को सील कर दिया।
दुकान सील परिजन परेशान, बाजार में कहीं नहीं मिल रहीं किताबें
प्रशासन ने आदर्श स्टेशनरी को तो सील कर दिया लेकिन इस दुकान पर मिलने वाली 13 स्कूल की किताबों को लेने पहुंच रहे परिजनों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई, दुकान सील होने से किताबें नहीं मिल रहीं, स्कूल संचालकों ने इस एक दुकान का ही पता दिया है तो किताबें यहीं मिलेंगी और कहीं नहीं लेकिन जब दुकान सील है तो परिजन कहाँ जाये इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है। परिजन कई बार चक्कर लगा चुके लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है, परिजनों ने एक और खुलासा करते हुए कहा कि आदर्श स्टेशनरी के नाम से शहर में तीन अलग अलग जगह दुकानें संचालित हैं, प्रशासन के नियमों के अनुसार पुस्तक मेले में भी तीन दुकान होनी चाहिए थी लेकिन तीनों दुकानों की किताबें एक ही स्टाल पर मिल रही थी जिसे सील कर दिया गया है तो अब बच्चों को किताबें कहा से दिलाएं, नाराज परिजनों का कहना है कि क्या हमारे पास एक ही काम है कि यहाँ चक्कर लगाते रहे?
नवीन सत्र में बिना किताबों के स्कूल आने वाले विद्यार्थियों को नहीं रोकने के निर्देश
उधर जिला प्रशासन के पास पहुंच रही शिकायतों के बाद कलेक्टर रुचिका चौहान ने निर्देश दिए हैं कि एक अप्रैल से नया शिक्षण सत्र प्रारंभ हो रहा है। नवीन शिक्षण सत्र में बिना पाठय पुस्तक एवं नोट नोट बुक के आने वाले विद्यार्थियों को स्कूल में आने से नहीं रोका जाएगा। विद्यार्थी को क्लास में बैठने दिया जायेगा। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा धिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने जिले के सभी स्कूलों को ये निर्देश जारी कर दिए हैं, आदेश में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन ऐसे विद्यार्थियों को पुस्तक मेला अवधि में और उसके बाद निर्धारित दुकानों से किताबें उपलब्ध करवाने में मदद करें जिससे वे उनके परिजन कोर्स खरीद सकें और बच्चों की पढ़ाई में बाधा न आये।
बिक्री के आंकड़े दिखाकर जिला प्रशासन खुद थपथपा रहा अपनी पीठ
उधर परिजनों की परेशानी के बावजूद जिला प्रशासन अपनी पीठ खुद थपथपा रहा है, आंकड़े दिखाते हुए जिला प्रशासन पुस्तक मेले को सफल बता रहा है, प्रशासन का कहना है कि पुस्तक मेला में अभिभावकों के द्वारा अपने बच्चों के लिए पुस्तकें व स्टेशनरी आदि सामान एक ही स्थान पर डिस्काउन्ट में मिलने के कारण उत्साह दिखाई दे रहा है। 30 मार्च तक मेले में 9229 अभिभावकों के द्वारा कुल 1,08,40,452 (एक करोड आठ लाख चालीस हजार चार सौ बावन) रुपये की पुस्तके व स्टेशनरी की खरीद अपने बच्चों के लिए की जा चुकी है।






