अतुल सक्सेना/ग्वालियर। दिल्ली में हो रही हिंसा के विरोध में ग्वालियर के नागरिकों ने शांति मार्च निकाल कर “अनेकता में एकता” हमारे देश की विशेषता” का संदेश दिया और अपील की कि इस साझी विरासत की हिफाज़त करना भी हम सब की जिम्मेदारी है। आपको बता दें कि दिल्ली में फैली हिंसा में अब तक 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। सांझी विरासत, सांझी हिफाजत” मंच के बैनर तले आज ग्वालियर के लोगों ने शांति मार्च निकाला। हाथों में स्लोगन लिखे बैनर लिए लोग शांति की अपील का रहे थे। लोगों का कहना था दिल्ली जल रही है,कौन जला रहा है ? किसने लगाई ये आग? इस विषय पर मतान्तर हो सकता है लेकिन हिंसा दुखदायी है, आखिर लहू का रंग तो एक ही है। पैदल मार्च में “राम-रहीम नेे दी आवाज,राष्ट्रीय एकता जिंदाबाद” के उद्घोष के साथ शहर के बुद्धिजीवी, साहित्यकार, पत्रकार, कलाकार, छात्र, नौजवान,और महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया । शांति मार्च फूल बाग गांधी पार्क से शुरू हुआ और लक्ष्मीबाई समाधि से होते हुए अम्बेडकर पार्क पहुंचकर समाप्त हुआ। पैदल मार्च के दौरान शहरवासियोंं से अपील की गई कि हम उस शहर के वासी है जहाँ संगीत सम्राट तानसेन और उनके गुरु मोहम्मद गौस एकसाथ दफन हैं। अनेकता में एकता ही हमारे देश की विशेषता है और इसे हमेंं कायम रखना और शांति, सद्भाव एवं भाईचारे की मिसाल पेश करना है।
दिल्ली हिंसा के विरोध में निकाला शांति मार्च, दिया भाईचारे का संदेश
Written by:Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






