बैंकिंग सेक्टर में नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) हमेशा सख्त कदम उठाता रहता है। एक बार फिर आरबीआई की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। सेंट्रल बैंक ने चार सहकारी बैंकों के खिलाफ कार्रवाई की है, जो देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं। दिशानिर्देशों का उल्लंघन होने पर मौद्रिक जुर्माना लगाया गया है।
महाराष्ट्र में स्थित हुतात्मा सहकारी बैंक लिमिटेड पर 5 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। वहीं कर्नाटक में स्थित शिमोगा डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। आंध्र प्रदेश में स्थित चित्तूर डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड पर भी एक लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है। उत्तर प्रदेश में स्थित सुल्तानपुर जिला सहकारी बैंक लिमिटेड पर आरबीआई ने 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। चारों बैंकों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी आरबीआई ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट http://www.rbi.org.in पर दी है।
31 मार्च 2025 तक इन बैंकों की वित्तीय स्थिति को चेक करने के लिए एक संवैधानिक निरीक्षण किया था। इस दौरान दिशा निर्देशों के अनुपालन में खामियों का पता चला। जिसके बाद सभी बैंकों को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया। इस पर मिली प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई प्रस्तुतियों के आधार पर सभी आरोप साबित हुए। इसके बाद पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
बैंकों ने तोड़े ये नियम
हुतात्मा सहकारी बैंक लिमिटेड, शिमोगा डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड और चित्तूर डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड ने निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए। वहीं उत्तर प्रदेश में स्थित सुल्तानपुर जिला सहकारी बैंक लिमिटेड ने चार सीआईसी में से किसी को भी उधारकर्ताओं की क्रेडिट इन्फॉर्मेशन जमा नहीं कर पाया। न ही खातों के जोखिम वर्गीकरण की आवधिक समीक्षा के लिए एक सिस्टम स्थापित कर पाया। इस बैंक ने संदिग्ध ट्रांजेक्शन की पहचान और रिपोर्टिंग के लिए एक सॉफ्टवेयर स्थापित करने में भी विफल रहा। पात्र दावा न की गई राशि को डिपॉजिट एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में निर्धारित समय सीमा के भीतर जमा भी नहीं कर पाया।
ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि चारों बैंकों के खिलाफ की गई कार्रवाई का असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने कहा कि, “यह कार्रवाई विनियामक खामियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य ग्राहक और बैंकों के बीच चल रहे किसी भी ट्रांजेक्शन या एग्रीमेंट की वैधता पर असर डालना नहीं है। न ही इसका असर भविष्य में होने वाली सेंट्रल बैंक की अन्य कार्रवाई पर पड़ेगा।”






