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PWD के चीफ इंजीनियर सूर्यवंशी को संभाग से हटाने की मांग तेज, प्रमुख सचिव को लिखा पत्र, उच्च न्यायालय ने माना अवमानना का दोषी

Written by:Atul Saxena
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चीफ इंजीनियर सूर्यवंशी ने एसोसियेशन का कार्यालय भवन वापस लेने के लिए भाजपा के जिला उपाध्यक्ष कनवर किशोर मंगलानी के नाम से झूठी करा दी , शिकायत के लिए भाजपा नेता का लैटर हैड हासिल किया और उस पर फर्जी दस्तखत कर शिकायत कर दी जो पकड़ी गई ।
PWD के चीफ इंजीनियर सूर्यवंशी को संभाग से हटाने की मांग तेज, प्रमुख सचिव को लिखा पत्र, उच्च न्यायालय ने माना अवमानना का दोषी

Gwalior HC

लोक निर्माण विभाग ग्वालियर (PWD Gwalior) में पदस्थ मुख्य अभियंता एसएल सूर्यवंशी को ग्वालियर से हटाने की मांग तेज हो गई है, मध्य प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसियेशन ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर सूर्यवंशी को ग्वालियर से हटाने की मांग की है, बता दें ग्वालियर उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसियेशन से जुड़े मामले में सूर्यवंशी को अवमानना का दोषी माना है, मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।

मध्य प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसियेशन (MPDEA) ग्वालियर ने विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर मुख्य अभियंता एसएल सूर्यवंशी को ग्वालियर संभाग से हटाने की मांग की है, पत्र में एसोसिएयेशन ने बताया कि मुख्य अभियंता सूर्यवंशी द्वारा गोलघर पड़ाव “अभियंता सदन” की झूठी शिकायतें स्वयं करवाकर संगठन एवं पदाधिकारियों की छवि धूमिल करने का षड्यंत्र कर रहे है। सूर्यवंशी ने तत्कालीन कार्यपालन यंत्री से कार्यालय आवंटन निरस्त करा दिया गया था जिस पर स्थगन आदेश जिला इकाई द्वारा लिया हुआ है।

MPDEA ने की चीफ इंजीनियर सूर्यवंशी के तबादले की मांग 

एसोसियेशन ने पत्र में कहा कि एसएल सूर्यवंशी कोर्ट द्वारा 28 फरवरी को दिए गए स्थगन आदेश की अवमानना करते हुए द्वेषपूर्ण कार्यवाही की जिसके कारण उच्च न्यायलय खंडपीठ ने 31 जुलाई को एसएल सूर्यवंशी को उच्च न्यायालय की अवमानना का दोषी पाया है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि ऐसे अधिकारी को ग्वालियर से हटाने का आदेश जारी किया जाये। एसोसियेशन ने पत्र की कॉपी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, और विभागीय मंत्री राकेश सिंह को भी भेजी है।

कूटरचित दस्तावेजों की मदद से अभियंता सदन वापस लेने का प्रयास 

मध्य प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसियेशन और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता एसएल सूर्यवंशी के बीच झगड़े की मुख्य वजह एसोसियेशन का दशकों पुराने कार्यालय है जिसे वापस लेने के लिए सूर्यवंशी ने कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया और शासन को शिकायत कर इसे खाली कराने के निर्देश दिए लेकिन झूठ तब सामने आ गया जब शिकायतकर्ता ही फर्जी निकला यानि जिसके नाम से शिकायत की गई उसको शिकायत की जानकारी ही नहीं थी उसके नाम से फर्जी दस्तखत कर शिकायत कर दी गई थी ।

ग्वालियर हाई कोर्ट में हुई मामले की सुनवाई 

उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने 30 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करते हुए चीफ इंजीनियर एसएल सूर्यवंशी के रवैये पर नाराजगी जताई,  न्यायाधीश मिलिंद रमेश फड़के की अदालत ने कहा- इस न्यायालय ने 21 जुलाई 2025 को मुख्य अभियंता एस एल सूर्यवंशी ग्वालियर को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था ताकि वे अगली सुनवाई की तारीख से पहले यह स्पष्ट कर सकें कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

कोर्ट को भी झांसा देने का प्रयास लेकिन पकड़े गए 

कोर्ट ने कहा सूर्यवंशी ने इस न्यायालय के दिनांक 28 फरवरी 2025 के अंतरिम आदेश का उल्लंघन करते हुए  8 जुलाई 2025 को एक पत्र जारी कर याचिकाकर्ताओं के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का पत्र जारी किया जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने सरकारी संपत्ति को ध्वस्त किया है। इसके बाद 29 जुलाई 2025 को स्पष्टीकरण दिया जिसमें पैरा-5 में मुख्य अभियंता ने बिना शर्त क्षमा याचना की थी, लेकिन बाद के पैराग्राफ में उन्होंने उक्त पत्र जारी करने के अपने रुख को सही ठहराने की कोशिश की थी और स्पष्टीकरण के साथ 21 जुलाई 2025 का एक और पत्र संलग्न किया ।

कोर्ट ने पकड़ी दस्तावेजों में छेड़छाड़, माना अवमानना का दोषी  

कोर्ट ने कहा उक्त पत्र में 8 जुलाई 2025 के पूर्व आदेश को चतुराई से संशोधित किया गया था और पुनः इंजीनियर वेलफेयर ट्रस्ट के ट्रस्टियों तथा ट्रस्ट के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। इन सभी बातों  को देखते हुए  मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग, ग्वालियर क्षेत्र, एसएल सूर्यवंशी को इस न्यायालय की अवमानना करने का दोषी पाया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को 2025 को होगी।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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