क्वारंटाइन सेंटर में कीड़े युक्त खाना मिलने पर SDM की नसीहत, ऑडियो वायरल

क्वारंटाइन सेंटर में कीड़े युक्त खाना मिलने पर SDM की नसीहत, ऑडियो वायरल

डबरा/सलिल श्रीवास्तव।
कोरोना जैसी वैश्विक महामारी की रोकथाम के लिये प्रशासनिक अधिकारी दिन रात एक किये हुए हैं और ब्यबस्था बनाने में लगे हुए है ताकी किसी को कोई परेशानी ना हो इन्हीं प्रयासों के बीच जिम्मेदार अफसर लापरवाहीपूर्ण व्यवहार कर रहे हैं । शिकायतों को गंभीरता से लेकर उनका समाधान न करते हुए न सिर्फ हल्के से ले रहे हैं बल्कि शिकायतकर्ता प्रतिनिधियों को ही ब्यबस्था बनाने का पाठ पढ़ा रहे है इस तरह का एक मामला भितरवार में सामने आया है जहाँ एसडीएम और जनपद सदस्य का ओडीयो बायरल हो रहा है जिसमें एसडीएम यह कहते सुने जा सकते है की खाना सही नहीं है तो अपने घर से भेज दो।
विभिन्न राज्यों एवं जिलों लौटे डेढ़ दर्जन लोगों को मोहनगढ़ स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास में को क्वॉरेंटाइन कराया गया है। जहां क्वॉरेंटाइन में रखे गए लोगों को निम्न स्तर का खाना दिया जा रहा है। इस तरह के खाने के संबंध में क्वॉरेंटाइन में रहने वाले लोगों के परिजन ने जनपद सदस्य एकता चंद्रशेखर तिवारी को अवगत कराया। उन्हें बताया कि क्वॉरेंटाइन सेंटर मोहनगढ़ क्वॉरेंटाइन में रखे गए लोगों को दिए जाने वाले खाने में लापरवाही बरती जा रही है । आरोप लगाया गया है कि सब्जी में कीड़े निकल रहे हैं खाना गुणवत्ताहीन दिया जा रहा है। इस तरह की शिकायत पर जनप्रतिनिधि होने के नाते जनपद सदस्य ने इसकी सूचना भितरवार एसडीएम केके सिंह गौर को दी। जिस पर उन्होंने गंभीरता से संज्ञान न लेते हुए महिला जनप्रतिनिधि को क्वॉरेंटाइन में रखे लोगों को अपने घऱ से खाना पहुंचाने की नसीहत दे डाली।

क्या कहा एसडीएम के के ग़ौर ने

सूचना मिलने पर सब्जी को फिकवा दिया गया था। मौके पर पहुंचकर खाना संबंधी शिकायत की जांच की गई। क्वॉरेंटाइन में रखे गए लोगों से भी चर्चा की गई।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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