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20 रुपये के जूस के वसूले 50 रुपये, अब दुकानदार को देने होंगे 5000, उपभोक्ता फोरम ने सुनाया आदेश

Written by:Atul Saxena
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मनोज उपाध्याय ने कहा कि अभी भी उपभोक्ताओं से एमआरपी से अधिक की वसूली की जा रही है, फोरम ने मुझे राशि देने के आदेश तो दे दिए लेकिन रमाडा होटल द्वारा संचालित कैफे के विरुद्ध कोई आदेश नहीं दिया वे इस बार में उचित कार्यवाही करेंगे जिससे आगे कोई ठगी नहीं कर सके।  
20 रुपये के जूस के वसूले 50 रुपये, अब दुकानदार को देने होंगे 5000, उपभोक्ता फोरम ने सुनाया आदेश

अधिकतम खुदरा मूल्य यानि MRP (Maximum Retail Price) से अधिक कीमत लेना नियम विरुद्ध है, लेकिन देश में कई जगह ये प्रचलन में है छोटी दुकान हो या फिर कैफे, रेस्टोरेंट, होटल कई बार इस तरह की घटनाएँ सामने आती है लेकिन लोग क़ानूनी उलझन से बचने के लिए इसकी शिकायत नहीं करते लेकिन ग्वालियर के एक वकील ने इसकी शिकायत की और उसने दुकानदार को सजा दिलाई है।

दरअसल ग्वालियर के रहने वाले एडवोकेट मनोज उपाध्याय जून 2024 में खजुराहो घूमने गए थे, उन्होंने भारतीय पुरातत्व संरक्षण ( ASI ) द्वारा संरक्षित मंदिरों और स्मारकों को देखा, यहीं उन्होंने इसी कैम्पस में संचालित रमाडा होतास्ल के कैफे पर जूस ख़रीदा।

आपत्ति जताने पर कह दिया हम तो इतना ही लेते हैं 

जब उन्होंने जूस का बिल देखा तो चौंक गए , जूस के पैकेट पर 20 रुपये एमआरपी थी लेकिन कैफे संचालक ने 50 रुपये लिए और उसका बिल भी दिया, जब मनोज उपाध्याय ने 20 रुपये की जगह 50 रुपये लिए जाने पर आपत्ति जताई तो कैफे वर्कर ने कह दिया कि हम तो इतना ही लेते है आपको जिससे शिकायत करनी हो कर दीजिये।

ASI ने नहीं दिया क़ानूनी नोटिस का जवाब 

एडवोकेट मनोज उपाध्याय ने इसे उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार और ठगी मानते हुए  ASI को इस लूट के खिलाफ क़ानूनी नोटिस भेजा कि आपके कैम्पस में आपके द्वारा उपलब्ध कराई गई जगह पर महँगी कीमत पर चीजें क्यों बेचीं जा रही हैं जबकि यहाँ तो देश विदेश का पर्यटक आता है लेकिन उन्होंने इअसपर कोई ध्यान नहीं दिया।

उपभोक्ता फोरम ने मानी अनुचित व्यापार प्रथा 

इसके बाद मनोज उपाध्याय ने ग्वालियर के जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत की, फोरम ने शिकायत को सही माना और 20 रुपये मूल्य की चीज पर 30 रुपये अधिक यानि कुल 50 रुपये वसूलना अनुचित व्यापार प्रथा है जिसपर कोर्ट ने कैफे संचालक को उपभोक्ता मनोज उपाध्याय से वसूले गए 50 रुपये की जगह 5000 रुपये और प्रकरण व्यय भी  देने के आदेश दिए।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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