लॉकडाउन में नदी से ज़िला पार, देखें वीडियो

लॉकडाउन में नदी से ज़िला पार, देखें वीडियो

डबरा।सलिल श्रीवास्तव।
लॉक डाउन का लगातार बढ़ना और जिलों की सीमा बंदी के बावजूद आमजन है कि अपने अपने सीमा क्षेत्र में रुकने को तैयार नहीं है ग्वालियर और दतिया जिले की सीमा कहने को तो दोनों और के प्रशासन ने सील कर दी है पर ग्रामीणों ने अपनी जान की परवाह ना करते हुए दोनों जिलों की सीमा में स्थित सिंध नदी में अस्थाई रास्ता बना लिया है लोग अपनी जान जोखिम में डालकर नदी में से निकल रहे हैं प्रतिदिन इस रास्ते से 300 से 400 लोग निकल रहे हैं।जिलो के साथ साथ दूसरे राज्यों से चोरी-छिपे आने वाले मजदूर भी इसी रास्ते का सहारा लेकर अपने गंतव्य को जा रहे हैं यहां गौर करने वाली बात यह है कि नदी में पानी है और लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इसे पार कर रहे हैं प्रशासनिक अधिकारियों जब इस मामले से अवगत कराया उन्होंने इसे गंभीर समस्या मानते हुए नदी में गहरे गहरे गड्ढे कराने की बात कही अब देखना यह है कि लोग रुकते हैं या फिर अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन को सुचारू रखते हैं।

आपको बता दें कि दतिया और ग्वालियर जिले की सीमा पर सिंध नदी है जो दोनों जिलों को बांटने का कार्य करती है दतिया जिले में गोरघाट और ग्वालियर जिले में डबरा थाना है कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के चलते दोनों ही जिलों के प्रशासन ने नदी के दोनों ओर पुलिस प्रशासन लगाकर नाकाबंदी कहे या सीमा बंदी कर दी है जिसके चलते दोनो ओर का आवागमन बंद है सिर्फ वही लोग आवागमन कर पा रहे थे जिन्हें अति आवश्यक सेवा के लिए अनुमति प्रदान की गई है ।

अब आपको बताते हैं कि क्यों खोजा गया यह रास्ता डबरा तहसील जिससे दतिया जिले की आने वाले अधिकांश गांव के लोग प्रतिदिन खरीदारी करने के लिए आते हैं चाहे वह किराना हो चिकित्सीय सेवा हो या अन्य सामग्री और तो और दतिया जिले से अनाज भी डबरा मंडी में बेचा जाता है और तो और डबरा नगर को प्रतिदिन उपलब्ध होने वाला दूध भी दतिया जिले के अधिकांश गांवों से आता है यही कारण रहा कि जब प्रशासन ने अनुमति नहीं दी तो उन्होंने अपनी जान खतरे में डाल ली और दतिया जिले के इंदरगढ़ गोराघाट,सुनारी,तिलेथा,भरसूला,कोटरा आदि गाँव के ग्रामीण इस रास्ते से डबरा आ और जा रहे हैं जिसका आँकड़ा प्रतिदिन दो सैकड़ा से अधिक हो जाता है जब हमने मौक़े पर जाकर देखा तो लोग बेधड़क नदी से होकर गुज़र रहे है फ़िलहाल प्रशासन को सख़्ती के साथ इस आबागमन को बंद कराना होगा क्योंकि एक ओर तो यह लोग कोरोना का संक्रमण बढ़ाने का ख़तरा पैदा कर रहे है तो दूसरी ओर अपनी जान से खिलाबाड कर रहे है साथ ही किसी बड़ी घटना से भी यहाँ इंकार नहीं किया जा सकता।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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