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पहलवान बजरंग पूनिया पर दुखों का पहाड़! पिता बलवान पूनिया का निधन, अस्पताल में चल रहा था इलाज, जानें…

Written by:Vijay Choudhary
Published:
पहलवान बजरंग पूनिया पर दुखों का पहाड़! पिता बलवान पूनिया का निधन, अस्पताल में चल रहा था इलाज, जानें…

टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया का आज दिल्ली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। शाम 6:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। इस दुखद खबर को बजरंग ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट के जरिए साझा किया। उन्होंने लिखा कि बापूजी अब हमारे साथ नहीं हैं और उनके बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल है। बलवान पूनिया ने अपने परिवार को सहारा देने के साथ-साथ बजरंग को पहलवानी की राह दिखाई।

बापूजी की मेहनत और त्याग ने बनाया चैंपियन

बजरंग पूनिया ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उनके पिता पूरे परिवार की रीढ़ थे। उन्होंने बड़ी मेहनत से बच्चों को आगे बढ़ाया और खुद पहलवान रह चुके बलवान पूनिया ने बचपन से ही बजरंग को कुश्ती के गुर सिखाए। उनका त्याग और प्रोत्साहन बजरंग के करियर की सबसे बड़ी ताकत बना। विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में बलवान पूनिया का अहम योगदान रहा। बजरंग ने कहा कि समझ नहीं आता कि उनके बिना आगे जीवन कैसा होगा। यह खबर खेल जगत के साथ पूरे देश के लिए भावुक कर देने वाली है।

हरियाणा से राजधानी तक

बजरंग पूनिया का परिवार हरियाणा के झज्जर जिले के खुडन गांव से है। कई साल पहले परिवार सोनीपत के मॉडल टाउन में बस गया था, जहाँ से बजरंग ने अपनी कुश्ती की राह शुरू की। पिता बलवान पूनिया ने अपने अनुभव से उन्हें तैयार किया और हर कदम पर साथ दिया। अब उनकी अनुपस्थिति परिवार के लिए गहरा शोक लेकर आई है। पूरे गांव और खेल प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके अंतिम संस्कार की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं, जहाँ खेल जगत से लेकर स्थानीय लोग भी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुँचेंगे।

 गांव में दी जाएगी विदाई

बलवान पूनिया का अंतिम संस्कार 12 सितंबर 2025 को उनके पैतृक गांव खुडन में किया जाएगा। परिवार और रिश्तेदारों के साथ खेल प्रेमियों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। पूरे गांव में शोक का माहौल है। बजरंग पूनिया खुद बेहद भावुक हैं और उनके साथ खेल जगत के कई बड़े खिलाड़ी इस कठिन समय में साथ खड़े हैं। बलवान पूनिया ने अपने त्याग और संघर्ष से न सिर्फ अपने परिवार को संभाला, बल्कि देश के लिए एक प्रतिभाशाली पहलवान भी तैयार किया। उनकी विदाई खेल और समाज दोनों के लिए बड़ी क्षति है।