हरियाणा में मूंग उगाने वाले किसानों को इस बार भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी मंडियों में मूंग की फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद न होने के कारण किसानों को प्राइवेट व्यापारियों को औने-पौने दामों पर फसल बेचनी पड़ रही है। इसी मुद्दे को उठाते हुए जननायक जनता पार्टी (JJP) के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला ने सरकार से सख्त शब्दों में मांग की है कि वह तुरंत मूंग की सरकारी खरीद शुरू करे और किसानों को उनका हक दिलाए।
मंडियों में नहीं हो रही MSP पर मूंग की खरीद
दिग्विजय चौटाला ने कहा कि राज्य की मंडियों में मूंग की सरकारी खरीद नहीं हो रही, जबकि सरकार ने इसका MSP 8700 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित कर रखा है। इसके बावजूद किसान मजबूरी में 5000 रुपये-6000 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर प्राइवेट व्यापारियों को मूंग बेच रहे हैं। इससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह सिर्फ कागज़ों में MSP की बात करती है, जबकि जमीनी स्तर पर किसानों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है।
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सरकार का दोहरा रवैया, MSP की आड़ में ढोंग
चौटाला ने कहा कि सरकार 24 फसलों की MSP पर खरीद की बात करती है, लेकिन उनमें नारियल और जूट जैसी फसलें भी शामिल हैं जो हरियाणा में होती ही नहीं। वहीं, मूंग जैसी फसल जो यहां के किसान बड़े पैमाने पर उगाते हैं, उसकी सरकारी खरीद न होना किसानों के साथ मज़ाक है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार केवल अखबारों और भाषणों में किसानों का हितैषी बनने की कोशिश कर रही है, लेकिन असलियत में किसान की आवाज़ को अनसुना किया जा रहा है।
नहरी पानी की कमी से बढ़ी मूंग की बिजाई
इस साल हरियाणा के कई जिलों जैसे सिरसा और फतेहाबाद में नहरी पानी की कमी रही, जिस कारण किसानों ने धान की जगह मूंग की बिजाई की। लेकिन अब जब फसल तैयार हुई तो उसे सरकार खरीद नहीं रही है। दिग्विजय चौटाला ने कहा कि किसान पहले ही सिंचाई की कमी और अब भारी बारिश से दोहरा नुकसान झेल रहे हैं। ऐसे में MSP न मिलना उनके साथ अन्याय है।
किसानों का हक छीना तो सड़क पर उतरेगी JJP
चौटाला ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत मूंग की सरकारी खरीद शुरू नहीं की, तो JJP किसानों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि MSP किसानों का हक है, और उसे कोई नहीं छीन सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को चाहिए कि वह मंडियों में तुरंत मूंग खरीद की व्यवस्था करे ताकि किसानों को उचित मूल्य मिल सके और उनका भरोसा सिस्टम पर बना रहे।