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हरियाणा में परीक्षाओं में कृपाण और मंगलसूत्र पहनने की इजाजत, सरकार ने लागू कीं ये शर्तें

Written by:Rishabh Namdev
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हरियाणा सरकार ने परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब सिख उम्मीदवार कृपाण और विवाहित महिलाएं मंगलसूत्र पहनकर परीक्षा दे सकेंगी। हालांकि, इसके लिए सरकार ने कुछ नियम-शर्तें भी तय की हैं, जिसमें परीक्षा केंद्र पर जल्दी पहुंचना भी शामिल है।
हरियाणा में परीक्षाओं में कृपाण और मंगलसूत्र पहनने की इजाजत, सरकार ने लागू कीं ये शर्तें

हरियाणा सरकार ने एक अहम आदेश जारी करते हुए सिख छात्रों और विवाहित महिलाओं को बड़ी राहत दी है। अब राज्य में होने वाली स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और प्रतियोगी परीक्षाओं में सिख उम्मीदवार कृपाण और विवाहित महिलाएं मंगलसूत्र पहनकर शामिल हो सकेंगी। यह फैसला उम्मीदवारों को हो रही समस्याओं और अदालती निर्देशों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

सरकार ने इस छूट के साथ कुछ शर्तें भी लागू की हैं, ताकि परीक्षा की सुरक्षा और पवित्रता बनी रहे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से सभी शैक्षणिक संस्थानों और भर्ती एजेंसियों पर लागू होगा।

कृपाण और मंगलसूत्र के लिए नियम

कृपाण और मंगलसूत्र के लिए नियम

सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को इन शर्तों का पालन करना होगा:

कृपाण: सिख उम्मीदवारों को निर्धारित आकार की कृपाण ले जाने की अनुमति होगी। कृपाण की कुल लंबाई 9 इंच (22.86 सेमी) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, जिसमें ब्लेड की लंबाई 6 इंच (15.24 सेमी) से अधिक न हो। ऐसे उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से एक घंटा पहले रिपोर्ट करना होगा।

मंगलसूत्र: विवाहित महिलाएं जो मंगलसूत्र पहनकर परीक्षा देना चाहती हैं, उन्हें परीक्षा केंद्र पर 30 मिनट पहले पहुंचना अनिवार्य होगा। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि सुरक्षा जांच के लिए पर्याप्त समय मिल सके और किसी तरह की कोई बाधा न हो।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार ने अपने आदेश में इस फैसले के पीछे दो मुख्य कारण बताए हैं। पहला, सिख छात्रों और विवाहित महिलाओं को अक्सर परीक्षा केंद्रों पर कृपाण और मंगलसूत्र उतारने के लिए कहा जाता था, जिससे उन्हें बार-बार समस्याओं का सामना करना पड़ता था।

दूसरा कारण विभिन्न अदालतों के फैसले हैं। आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्णयों का हवाला दिया गया है। इन फैसलों में कहा गया है कि परीक्षाओं के सुचारू संचालन के साथ-साथ नागरिकों के धर्म और संस्कृति से जुड़े अधिकारों की भी रक्षा की जानी चाहिए। यह कदम परीक्षा प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने और उम्मीदवारों की धार्मिक आस्था का सम्मान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।