हरियाणा पुलिस के पूर्व DGP रह चुके IPS अधिकारी निर्मल सिंह का WhatsApp नंबर हैक कर साइबर ठगों ने उनके संपर्कों को पैसों की मांग वाले संदेश भेज दिए। इस धोखाधड़ी में अंबाला के एक हेड कांस्टेबल से 40 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। शिकायत मिलने के बाद पंचकूला साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि ठगों ने किसी सामान्य नंबर की जगह एक वरिष्ठ पूर्व पुलिस अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल किया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ठगों ने मैसेज भेजते समय भरोसा पैदा करने की कोशिश की, लेकिन अधिकांश परिचित भाषा और संदेश के तरीके से सतर्क हो गए और पैसे नहीं भेजे।
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कॉल, पार्सल और फिर WhatsApp पर कब्जा
निर्मल सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 9 मार्च की शाम करीब 4 बजे उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि उनके नाम एक पार्सल आया है और उसकी जानकारी लेने के लिए फोन से कॉल करने को कहा। इसी प्रक्रिया के दौरान WhatsApp से जुड़ी OTP व्यवस्था का दुरुपयोग हुआ और ठगों ने उनका नंबर अपने फोन पर चला लिया।
“9 मार्च की शाम करीब 4 बजे एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। पार्सल की बात कहकर प्रक्रिया कराई गई और उसके बाद मेरा WhatsApp दूसरे फोन में शुरू हो गया।” — निर्मल सिंह
साइबर अपराध के ऐसे मामलों में अक्सर ठग पहले भरोसे का बहाना बनाते हैं, फिर तकनीकी सत्यापन या OTP से जुड़ी चाल चलते हैं। इस मामले में भी कथित तौर पर यही पैटर्न सामने आया, जिसके बाद संपर्क सूची में मौजूद लोगों को पैसों की मांग वाले मैसेज भेजे गए।
अधिकांश लोग बचे, एक पुलिसकर्मी से राशि ट्रांसफर
जांच से जुड़े शुरुआती विवरण में सामने आया कि ठगों ने कई परिचितों को एक ही तरह के संदेश भेजे। कई लोगों ने संदेश की भाषा और संदर्भ देखकर संदेह जताया और पुष्टि करने की कोशिश की। लेकिन अंबाला के एक हेड कांस्टेबल ने मैसेज को वास्तविक मानते हुए 40 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
यह बिंदु जांच का अहम हिस्सा है कि राशि किस खाते या भुगतान माध्यम से भेजी गई और आगे उसका प्रवाह किस तरह हुआ। साइबर पुलिस आमतौर पर ऐसे मामलों में बैंकिंग ट्रेल, UPI रिकॉर्ड, लिंक्ड मोबाइल नंबर और डिवाइस लॉग की जांच करती है। फिलहाल पुलिस ने औपचारिक केस दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू होने की पुष्टि की है।
पूर्व DGP का प्रोफाइल और पुराना रिकॉर्ड
IPS अधिकारी निर्मल सिंह जुलाई 2005 में हरियाणा के DGP पद पर तैनात हुए थे और 31 अक्टूबर 2006 को सेवानिवृत्त हुए। सेवा के दौरान वे अंबाला में एक रेड में भी पहुंचे थे। उस समय वे राजस्थानी वेशभूषा में गए थे और एक SHO को रिश्वत लेते पकड़े जाने की कार्रवाई चर्चा में रही थी।
मौजूदा प्रकरण में उन्होंने खुद साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि पहचान-आधारित डिजिटल धोखाधड़ी में भाषा, तात्कालिकता और भरोसे का दबाव बनाकर पैसा मांगा जाता है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तकनीकी घुसपैठ किस तरीके से की गई और कितने लोगों को मैसेज भेजे गए।
पंचकूला साइबर थाना अब शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रहा है। जांच का फोकस WhatsApp एक्सेस, इस्तेमाल किए गए नंबर, फंड ट्रांसफर की दिशा और संबंधित डिजिटल साक्ष्यों पर रहेगा।