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हरियाणा में आंगनबाड़ी हेल्पर बनेगी वर्कर‎, प्रमोशन कोटा 25% से बढ़ाकर 50%, नई भर्ती का रास्ता खुलेगा

Written by:Vijay Choudhary
Published:
हरियाणा में आंगनबाड़ी हेल्पर बनेगी वर्कर‎, प्रमोशन कोटा 25% से बढ़ाकर 50%, नई भर्ती का रास्ता खुलेगा

Anganwadi worker honorarium hike

हरियाणा सरकार ने महिला और बाल विकास विभाग के आंगनबाड़ी हेल्परों को बड़ी सौगात दी है। अब पदोन्नति (promotion) कोटा 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है, जिससे अनुभवी और समर्पित हेल्पर को आंगनबाड़ी वर्कर बनने का मौका मिलेगा। यह बदलाव केवल पदोन्नति तक सीमित नहीं है — इससे खाली हुए पदों पर नई भर्ती भी होंगी। इन बदलावों का मतलब यह है कि अब चुने गए हेल्पर वर्कर बनकर ज्यादा जिम्मेदारियां उठा सकते हैं — जैसे बच्चों को तैयार करना, पोषण योजनाएं चलाना और समुदाय में समन्वय बनाए रखना।

इससे उनके अनुभव को भी पहचान मिलेगी। जब हेल्पर वर्कर के पदों पर पदोन्नत होंगे, तो खाली हुए हेल्पर पदों को भरा जाएगा। इससे दोनों वर्ग — हेल्पर और वर्कर — में अवसर बनेंगे और आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। वर्तमान में हरियाणा में लगभग 25,962 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। वहीं, 23,106 वर्कर और 20,641 हेल्पर ही कार्यरत हैं। इस पदोन्नति से करीब 22,000 हेल्पर लाभान्वित हो सकते हैं — जो लंबे समय से इस इंतज़ार में थे।

महिला सशक्तिकरण की दिशा

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने बताया कि यह निर्णय सीधे तौर पर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है। अनुभव और काम के प्रदर्शन पर भरोसा रखते हुए उन्हें उन्नति का मौका मिलना आत्मसम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता दोनों को बढ़ा सकता है। यह निर्णय केंद्र सरकार के Saksham Anganwadi और Poshan 2.0 नीति से मेल खाता है, जिसके तहत वर्कर पदों का 50% उत्साहित हेल्परों में से लिया जाना था। हरियाणा ने इसे राज्य स्तर पर सच करके एक मजबूत उदाहरण पेश किया है।

सकारात्मक कदम उठाया

हरियाणा सरकार ने आंगनबाड़ी हेल्परों के लिए एक बहुत ही सकारात्मक कदम उठाया है। लंबे समय से इंतज़ार कर रही हेल्परों को अब पदोन्नति और मान्यता मिलेगी। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे आंगनबाड़ी केंद्रों में और बेहतर काम कर पाएंगे। इस बदलाव से बच्चों को मिलने वाली शिक्षा और पोषण सेवाओं की गुणवत्ता भी सुधरेगी। साथ ही, हेल्परों को आर्थिक और सामाजिक सम्मान भी मिलेगा, जिससे वे और अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनेंगे। यह कदम न सिर्फ प्रशासनिक सुधार है बल्कि महिलाओं और बच्चों के हित में एक महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव भी है।