Hindi News

हरियाणा में चौंकाने वाला मामला, कांग्रेस नेता के घर का बिजली बिल आया 78.92 करोड़ रुपये, विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

Written by:Ankita Chourdia
Published:
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने नारनौल में यूथ कांग्रेस के जिला प्रधान पुनीत बुलाना की मां को 6 दिन का ₹78 करोड़ 92 लाख रुपये का बिजली बिल भेज दिया है। परिवार ने इसे सरकार द्वारा जानबूझकर भेजा गया बिल बताया है, वहीं इतनी बड़ी राशि का बिल आने से निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। बिल में 6 दिन के लिए लगभग 10 करोड़ यूनिट बिजली खपत दिखाई गई है, जो असंभव है।
हरियाणा में चौंकाने वाला मामला, कांग्रेस नेता के घर का बिजली बिल आया 78.92 करोड़ रुपये, विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने नारनौल में यूथ कांग्रेस के जिला प्रधान पुनीत बुलाना के घर का 78 करोड़ 92 लाख रुपये का बिजली बिल भेजकर सबको चौंका दिया है। यह बिल उनकी मां बिमला देवी के नाम से जारी हुआ है। सिर्फ छह दिन की रीडिंग के लिए लगभग 10 करोड़ यूनिट बिजली खपत दिखाते हुए यह बिल भेजा गया, जिसे देखकर परिवार के होश उड़ गए। कांग्रेस नेता ने इसे सरकार की ओर से जानबूझकर की गई कार्रवाई बताया है, जबकि विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

सामान्य बिजली खपत के बावजूद आया भारी-भरकम बिल

यूथ कांग्रेस के जिला प्रधान पुनीत बुलाना नारनौल के गांव हसनपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि उनके घर में मां बिमला देवी के नाम से 10 किलोवाट का एक एनडीएस बिजली कनेक्शन लिया हुआ है। इस कनेक्शन पर एक छोटी आटा पिसाई की चक्की चलती थी, लेकिन वह भी पिछले दो साल से बंद पड़ी है। ऐसे में घर में केवल सामान्य घरेलू बिजली का ही इस्तेमाल होता है। यह कनेक्शन एक छोटे व्यवसायिक उद्देश्य के लिए था, लेकिन अब पूरी तरह से घरेलू इस्तेमाल तक सीमित है।

बुलाना परिवार के मुताबिक, उनके बिजली बिल हमेशा सामान्य आते रहे हैं। मार्च महीने में उन्होंने लगभग 63,546 रुपये का भुगतान किया था, जो एक छोटे व्यवसायिक या बड़े घरेलू कनेक्शन के लिए सामान्य राशि थी। लेकिन, इस बार अचानक करोड़ों रुपये का बिल आने से वे पूरी तरह से परेशान हो गए हैं और समझ नहीं पा रहे हैं कि ऐसी स्थिति में क्या किया जाए।

पुनीत बुलाना ने जानकारी दी कि बीते कल उनके मोबाइल फोन पर बिजली निगम का एक मैसेज आया। यह मैसेज देखते ही वे हैरान रह गए क्योंकि इसमें उनकी मां के नाम पर लिए गए कनेक्शन का बिल 78 करोड़ 92 लाख 75 हजार 697 रुपये दिखा रहा था। मैसेज में दिख रही इस खगोलीय राशि को देखकर परिवार को पहले तो अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। उन्होंने कई बार मैसेज को जांचा, लेकिन आंकड़े वही थे। इस असाधारण बिल ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है।

6 दिन की रीडिंग, लेकिन राशि 78 करोड़ पार

निगम द्वारा जारी किए गए बिल में बिलिंग अवधि अप्रैल 2026 की दिखाई गई है, जो अपने आप में एक बड़ी विसंगति है क्योंकि यह भविष्य की तारीख है। वहीं, मीटर रीडिंग की अवधि मात्र 6 दिनों की बताई गई है, यानी 15 मार्च से 21 मार्च 2026 तक की। यह तारीख भी भविष्य की है, जो पूरे मामले को और भी उलझा देती है। बिल में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, कुल देय राशि 78,92,75,697 रुपये है। इसमें एनर्जी चार्जेस 71,69,95,908 रुपये और म्युनिसिपल टैक्स 1,52,79,316 रुपये दर्शाया गया है। यह आंकड़े किसी भी सामान्य उपभोक्ता के लिए अकल्पनीय हैं।

10 करोड़ यूनिट बिजली खपत

इस बिल का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसमें दर्ज यूनिट्स की संख्या है। बिल में बिल्ड यूनिट्स 9,99,99,429 दर्ज हैं। यह लगभग 10 करोड़ यूनिट बिजली खपत है, जो किसी भी छोटे या बड़े उपभोक्ता के लिए, खासकर 6 दिन की अवधि में, एक असंभव संख्या मानी जा रही है। एक आम घर या एक छोटी आटा चक्की चलाने वाले उपभोक्ता के लिए इतनी भारी मात्रा में बिजली की खपत करना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है। इतनी बिजली तो किसी बड़े औद्योगिक संस्थान या एक छोटे शहर की कुल मासिक खपत के बराबर हो सकती है। यह आंकड़ा ही अपने आप में विभाग की गंभीर गलती की ओर साफ इशारा करता है।

परिवार की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि बिल पर भुगतान की अंतिम तिथि 8 अप्रैल 2026 दर्ज है। यदि नियत समय पर इस बिल का भुगतान नहीं किया जाता है, तो सरचार्ज लगने से यह राशि 80 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है। परिवार का कहना है कि वे इस भारी-भरकम राशि का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं और न ही उन्होंने इतनी बिजली का इस्तेमाल किया है। यह स्थिति उनके लिए मानसिक तनाव का कारण बन गई है।

पुनीत बुलाना ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि यह बिल सरकार ने जानबूझकर भेजा है। उनके अनुसार, राजनीतिक द्वेष के चलते उनके परिवार को परेशान करने के लिए इस तरह का मनमाना बिल भेजा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस मामले को लेकर अधिकारियों से मिलेंगे और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई का सहारा भी लेंगे। हालांकि, इस आरोप पर अभी तक बिजली निगम या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे स्थिति और भी अस्पष्ट बनी हुई है।

बिलिंग प्रक्रिया पर खड़े हुए गंभीर सवाल

प्रारंभिक तौर पर इस पूरे मामले को सॉफ्टवेयर की तकनीकी गड़बड़ी या डाटा एंट्री में हुई मानवीय गलती का परिणाम माना जा रहा है। ऐसे मामलों में अक्सर देखा जाता है कि सिस्टम में कोई एरर आ जाता है या फिर डाटा एंट्री करते समय कर्मचारी से कोई बड़ी चूक हो जाती है, जिससे बिल में गलत आंकड़े दर्ज हो जाते हैं। आमतौर पर, ऐसे मामलों में विभाग बिल को रद्द कर संशोधित बिल जारी करता है। लेकिन, इतनी बड़ी राशि और इतनी अविश्वसनीय यूनिट्स का बिल सार्वजनिक होने से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की कार्यप्रणाली और उसकी बिलिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग की ओर से कोई त्वरित स्पष्टीकरण न आना भी उनकी पारदर्शिता पर संदेह पैदा करता है।

इस घटना ने उपभोक्ताओं के बीच भी चिंता पैदा कर दी है कि अगर एक राजनेता के परिवार के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम उपभोक्ता के साथ क्या होगा। कई बार छोटे बिलों में भी गलतियां होती हैं, लेकिन यह मामला अपने आप में एक बड़ा उदाहरण है। विभाग को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और गलती को सुधारते हुए एक स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहे और भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति न हो। विभाग के उच्च अधिकारियों को इस पूरे प्रकरण की जांच कर जल्द से जल्द सच्चाई सामने लानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

बिजली बिल

Ankita Chourdia
लेखक के बारे में
Follow Us :GoogleNews