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HPSC भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, फोरेंसिक विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद प्रमोशन से भरने का आदेश

Written by:Rishabh Namdev
Published:
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा फोरेंसिक विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर के दो पदों पर सीधी भर्ती को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब विभाग में प्रमोशन के लिए योग्य अधिकारी मौजूद हैं, तो सीधी भर्ती का कोई अधिकार नहीं। इस फैसले से विभागीय अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है।
HPSC भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, फोरेंसिक विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद प्रमोशन से भरने का आदेश

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) को बड़ा झटका देते हुए फोरेंसिक साइंस विभाग में की जा रही सीधी भर्ती को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने असिस्टेंट डायरेक्टर (टॉक्सिकोलॉजी) के दो पदों पर जारी भर्ती विज्ञापन को खारिज करते हुए कहा कि इन पदों को प्रमोशन के जरिए भरा जाना चाहिए था।

जस्टिस जगमोहन बंसल की बेंच ने यह अहम फैसला सुनाते हुए विभागीय अधिकारियों के प्रमोशन के अधिकार को बरकरार रखा है। इस निर्णय से उन वरिष्ठ अधिकारियों को राहत मिली है जो लंबे समय से अपनी पदोन्नति का इंतजार कर रहे थे।

क्या था पूरा मामला?

हरियाणा सरकार ने 15 जुलाई को एक विज्ञापन जारी कर फोरेंसिक साइंस विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर (टॉक्सिकोलॉजी) के दो पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरने की प्रक्रिया शुरू की थी। सरकार के इस फैसले को फोरेंसिक साइंस लैब, मधुबन में कार्यरत दो सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर, राम निवास नैन और उनके एक सहकर्मी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि वे कई वर्षों से विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और सेवा नियमों के अनुसार, असिस्टेंट डायरेक्टर के पद पर पदोन्नति उनका पहला अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उन्हें नजरअंदाज कर सीधे बाहर से भर्ती कर रही है, जो नियमों का उल्लंघन है।

सरकार की दलील कोर्ट ने नहीं मानी

मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार और HPSC ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता प्रमोशन के लिए जरूरी अनुभव की शर्त पूरी नहीं करते हैं। सरकार के मुताबिक, भले ही दोनों अधिकारी 2013 और 2016 से सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे थे, लेकिन उनकी नियमित पदोन्नति 2021 में हुई थी। इसलिए, उनके पास 5 साल का ‘नियमित सेवा’ का अनुभव नहीं था, जिसके चलते सीधी भर्ती का फैसला लेना पड़ा।

नियमों में ‘नियमित’ शब्द नहीं: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने सरकार और HPSC की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। जस्टिस बंसल ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सेवा नियमों में सिर्फ ‘सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर के रूप में 5 वर्ष का अनुभव’ लिखा है, उसमें कहीं भी ‘नियमित सेवा’ जैसे शब्द का उल्लेख नहीं है।

कोर्ट ने टिप्पणी की, “न तो सरकार और न ही अदालत, सेवा नियमों में अपनी तरफ से कोई शब्द जोड़ सकती है। ‘नियमित सेवा’ जैसी शर्त लगाना कानूनन गलत है।”

कोर्ट ने पाया कि दोनों याचिकाकर्ता 2013 और 2016 से लगातार सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर के पद पर काम कर रहे थे। इस आधार पर उनके पास 5 साल से कहीं ज्यादा का अनुभव था और वे पदोन्नति के लिए पूरी तरह से पात्र थे। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने सीधी भर्ती के विज्ञापन को रद्द करने का आदेश दिया और कहा कि इन पदों को पहले प्रमोशन से भरा जाए।