भोपाल गैस त्रासदी मामले (Bhopal Gas Tragedy) में बड़ी अपडेट सामने आई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 17 सितंबर बुधवार को भोपाल ट्रायल कोर्ट को तेजी से क्रिमिनल केस का निपटान करने का निर्देश जारी किया है। इसके अलावा इस मामले से जुड़े आरोपियों पर जल्द से जल्द फैसला सुनाने को भी कहा है। जिसमें यूनियन कार्बाइड के तत्काल चैयरमैन वॉरन एंडरसन का नाम भी शामिल है।
हाई कोर्ट ने यह फैसला भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनाया है। सुनवाई के दौरान जब सरकारी पक्ष ने इस मामले में स्थगन की मांग भी की तब चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफा की बेंच ने कहा कि, “हम 40 साल तक मामले को लंबित नहीं रख सकते हैं।” कोर्ट के इस फैसले के बाद पीड़ितों में न्याय की नई उम्मीद जगी है।
बता दें कि दिसंबर 1984 में भोपाल में स्थित यूनियन कार्बाइड प्लांट में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का हिसाब हुआ था। जिसके कारण हजारों लोगों की जान चली गई थी। लाखों लोग इससे प्रभावित हुए थे। यह दुनिया के भयानक औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक है। आज भी कई लोग स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना कर रहे हैं। साल से न्याय की गुहार भी लगा रहे हैं। लेकिन अब तक इस मामले में कोई भी फैसला नहीं आया है।
मंथली प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करने का आदेश
हाई कोर्ट ने भोपाल ट्रायल कोर्ट को गैस त्रासदी से संबंधित मंथली प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करने का आदेश भी दिया है। ताकि नियमित तौर पर इस मामले के स्टेटस की जांच की जा सके। चीफ जस्टिस खुद प्रकरणों के प्रोग्रेस रिपोर्ट को देखेंगे। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जिसे प्रशासनिक पक्ष पर मुख्य न्यायाधीश के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
ताकि इस मामले में कोई लापरवाही या देरी की गुंजाइश न रहे। पीड़ितों को जल्द से जल्द से न्याय मिल सके, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा।
5 अक्टूबर तक मामला स्थगित
याचिकाकर्ता ने ने बताया कि मामला 5 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया गया है। उनका कहना है कि आरोपी अक्टूबर 2023 से ही अदालत में उपस्थित हो रहे हैं फिर भी अब तक कोई आदेश पारित नहीं किया गया है। न ही ट्रायल शुरू हुआ है।
जजों के तबादले और रिटायरमेंट पर रोक की याचिका रद्द
भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति द्वारा दायर अन्य याचिका भी दायर की थी। जिसमें यह मांग की गई थी कि 1984 गैस त्रासदी से जुड़े मामलों का जब तक फैसला न हो जाए तब तक संबंधित जजों का तबादला पदोन्नति या रिटायरमेंट पर रोक लगाई जाए। इस याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है।






