मन की बात: PM मोदी ने मांगी देश से माफ़ी, बोले-आपको बचाने का यही तरीका था

मन की बात: PM मोदी ने मांगी देश से माफ़ी, बोले-आपको बचाने का यही तरीका था

दिल्ली।

कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को लेकर पीएम मोदी ने आज देशवासियों से माफ़ी मांगी है। पीएम मोदी ने कहा कि देशवासियों से क्षमा मांगते हैं, क्योंकि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कुछ ऐसे फैसले लेने पड़े हैं जिनसे देशवासियों को तकलीफ उठानी पड़ रही है, पीएम मोदी ने ग़रीबों से विशेष कर क्षमा मांगी है।

दरअसल, दो बार जनता से रुबरु होने के बाद आज पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में भी कोरोना का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि मैं इन कठोर कदमों के लिए माफ़ी चाहता हूं, जिन्होंने आपके जीवन में कठिनाइयों को जन्म दिया है, खासकर ग़रीब लोगों को। मुझे पता है कि आप मे से कुछ मुझसे नाराज़ भी होंगे। लेकिन इस लड़ाई को जीतने के लिए इन कठोर उपायों की जरूरत थी।मोदी ने कहा कि 130 करोड़ आबादी वाले देश को बचाने के लिए जीवन और मौत की लड़ाई में जीतना है ये कठोर कद उठाने थे। इसके अलावा कोई और रास्ता हीं था। इस वक्त दुनिया की जो स्थिति है उसे देखकर लगता है कि लॉकडाउन की एकमात्र रास्ता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 63वीं बार मन की बात कार्यक्रम कर रहे हैं। हर महीने के आखिरी रविवार को पीएम मोदी जनता को संबोधित करते हैं। इस बार कार्यक्रम कोरोना वायरस यानी कोविड- 19 पर फोकस है। कोरोना पर इससे पहले दो बार राष्ट्र को संबोधित कर चुके है।इससे पहले पीएम मोदी ने रविवार के रेडियो कार्यक्रम के लिए ट्विटर पर विचार मांगे थे। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी का रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ हर माह के आखिरी रविवार को प्रसारित किया जाता है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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