हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शिमला में हुई शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में विज्ञान, कला और खेल जैसे विशिष्ट महाविद्यालयों की स्थापना पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने विभाग को इसकी संभावनाएं तलाशने और विभिन्न विषयों के युक्तीकरण के लिए गहन अध्ययन करने के निर्देश दिए, ताकि अगले सत्र से आवश्यक बदलाव लागू किए जा सकें।
बैठक में मुख्यमंत्री ने रोजगारपरक नए विषयों की पहचान करने और महाविद्यालयों की ग्रेडिंग पूर्ण करने पर जोर दिया, ताकि स्टाफ और बुनियादी ढांचे की जरूरतों को पूरा किया जा सके। शिक्षा विभाग में रिक्त पदों को भरने और स्कूली पाठ्यक्रम में राज्य-विशिष्ट विषयों को शामिल करने के भी निर्देश दिए गए। इसके अलावा, राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल खोल रही है, जिनमें से आठ स्थानों पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और 56 मौजूदा स्कूलों को स्तरोन्नत करने पर विचार चल रहा है।
शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मॉक टेस्ट
शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए स्कूलों में मॉक टेस्ट और जीरो पीरियड अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थानों में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देने को कहा। बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने विभाग की योजनाओं पर प्रेजेंटेशन दी, हालांकि शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और स्कूल शिक्षा निदेशक सराज दौरे के कारण देरी से पहुंचे या अनुपस्थित रहे।
शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की मांग
शिक्षा विभाग में तबादले, पदोन्नति और सेवानिवृत्ति को एक बार में करने की योजना पर भी चर्चा हुई, जिसका अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल में लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विभाग को इस संबंध में विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए। यह कदम शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे हिमाचल में शिक्षा का स्तर और ऊंचा हो सके।





