हिमाचल प्रदेश में भाजपा ने संगठन विस्तार का नया रिकॉर्ड बना दिया है। पार्टी ने 24,576 कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंपकर एक विशाल जंबो टीम तैयार की है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के नेतृत्व में बीते चार महीनों में 16,582 कार्यकर्ताओं को राज्य से लेकर मंडल स्तर तक पदाधिकारी बनाया गया है। इसके अलावा प्रदेश के 8007 बूथों में से 7994 बूथों पर अध्यक्ष नियुक्त कर दिए गए हैं। वहीं, कांग्रेस अब तक अपनी कार्यकारिणी के गठन में पिछड़ रही है और केवल प्रदेश अध्यक्ष के सहारे चल रही है।
हिमाचल भाजपा ने खड़ी की जंबो टीम
भाजपा के प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल ने बताया कि भाजपा एक कार्यकर्ता आधारित पार्टी है, जहां जिम्मेदारी योग्यता और सक्रियता के आधार पर दी जाती है। उन्होंने कहा कि काम करने वाले और संगठन को मजबूत करने वाले कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई है। पार्टी ने प्रदेश कार्यसमिति में 200 कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंपा है। सात में से छह मोर्चों का गठन पूरा हो चुका है और इन मोर्चों में 253 कार्यकर्ताओं को राज्य पदाधिकारी बनाया गया है। केवल अल्पसंख्यक मोर्चा का गठन बाकी है।
भाजपा के 17 संगठनात्मक जिलों में 1222 नियुक्तियां की जा चुकी हैं, जबकि छह मोर्चों में 3060 कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंडल स्तर पर संगठन को और मजबूत करते हुए भाजपा ने मंडलों की संख्या 74 से बढ़ाकर 171 कर दी है। इन मंडलों की कार्यसमितियों में 10,821 नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं। मंडल स्तर के सभी मोर्चा अध्यक्षों का चयन भी कर लिया गया है, जिनकी संख्या 1026 है।
संजीव कटवाल ने क्या कहा?
संजीव कटवाल ने कहा कि डॉ. राजीव बिंदल का चयन एक जुलाई 2025 को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में हुआ था, और सिर्फ चार महीनों में इतनी बड़ी संगठनात्मक मजबूती भाजपा की अनुशासित कार्यसंस्कृति को दिखाती है। उन्होंने कहा कि भाजपा में कार्यकर्ताओं को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाता है, जिससे संगठनिक एकता और कार्यक्षमता दोनों बढ़ती हैं।
इसके विपरीत कांग्रेस की स्थिति कमजोर बताई जा रही है। कटवाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने प्रदेश अध्यक्ष या कार्यकारिणी का गठन अब तक नहीं कर पाई है। कई बार बैठकों के बावजूद समन्वय नहीं बन पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार नगर इकाइयों के चुनाव टालने की कोशिश कर रही है क्योंकि संगठन स्तर पर उसकी तैयारी अधूरी है। भाजपा का मानना है कि यह मजबूत संगठनात्मक ढांचा आगामी चुनावों में उसकी बड़ी ताकत बनेगा।





