प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के हालात और इसका देश में पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतों पर पड़ने वाले असर पर चर्चा की। पीएम मोदी ने सभी राज्यों को इन जरूरी चीजों की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी इस महत्वपूर्ण बैठक में शिमला से जुड़े।

बैठक का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव था। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है। केंद्र सरकार को चिंता है कि इन वैश्विक हालातों का फायदा उठाकर देश में कुछ तत्व जरूरी सामानों की कृत्रिम कमी पैदा कर सकते हैं या उनकी कालाबाजारी कर सकते हैं, जिससे आम जनता को परेशानी होगी।

राज्यों से ‘टीम इंडिया’ की तरह मिलकर काम करने को कहा

प्रधानमंत्री मोदी ने सभी राज्यों से ‘टीम इंडिया’ की तरह मिलकर काम करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य अपनी तैयारियां पूरी रखें और यह सुनिश्चित करें कि बाजार में किसी भी तरह की कृत्रिम कमी न पैदा हो। कृत्रिम कमी यानी, जब बाजार में सामान उपलब्ध होते हुए भी, उन्हें जानबूझकर छिपाकर या स्टॉक करके महंगे दामों पर बेचा जाए। खास तौर पर पेट्रोलियम उत्पादों और गैस सिलेंडर की सप्लाई को सुचारू बनाए रखने पर जोर दिया गया। पीएम ने स्पष्ट किया कि जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता हर हाल में बनी रहनी चाहिए और जमाखोरी व कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। इसके लिए राज्यों को जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने को कहा गया है।

राज्य में जल्द ही पर्यटन सीजन भी शुरू होने वाला है

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य के लिए यह बैठक और इसमें हुई चर्चा बेहद अहम है। यहां पहले से ही परिवहन लागत दूसरे राज्यों के मुकाबले ज्यादा होती है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में थोड़ी भी बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। इसके अलावा, राज्य में जल्द ही पर्यटन सीजन भी शुरू होने वाला है। गर्मियों में देश-विदेश से लाखों पर्यटक हिमाचल आते हैं। ईंधन की कीमतें बढ़ने से पर्यटन उद्योग भी सीधे तौर पर प्रभावित होगा। टूर ऑपरेटरों, होटल मालिकों और टैक्सी चालकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बैठक में राज्य की विशिष्ट स्थिति और संभावित चुनौतियों को सामने रखा होगा।

प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों से ग्राउंड लेवल पर तैयारियों का फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) पर लगातार नजर रखें। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों पर स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे और कहीं भी स्टॉक की कमी न हो। किसी भी तरह की अफवाह या पैनिक बाइंग (panic buying) से बचने के लिए भी राज्यों को सतर्क रहने और जनता को सही जानकारी देने को कहा गया। पीएम ने कहा कि ऐसी स्थितियों में सूचनाओं का सही और समय पर प्रसार बहुत जरूरी है।

हिमाचल में अभी स्थिति सामान्य बनी हुई है, जो राहत की बात है। राज्य में पेट्रोल और डीजल की कोई किल्लत नहीं है। राज्य में जितनी डिमांड है, उतनी सप्लाई मिल रही है। हालांकि, कुछ दिन पहले कमर्शियल सिलेंडर की जरूर कमी देखी गई थी। यह कमी कुछ समय के लिए बनी रही, लेकिन अब धीरे-धीरे कमर्शियल सिलेंडर भी मिलने लगे हैं। राज्य सरकार और संबंधित विभाग इस पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि भविष्य में कोई समस्या न आए और आम जनजीवन प्रभावित न हो। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आपूर्ति कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में रहें।

केंद्र सरकार ने राज्यों को हिदायत दी है कि वे जमाखोरों और कालाबाजारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया जा सकता है, जो बाजार में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता और उनकी कीमतों पर लगातार नजर रखेंगी। यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि वैश्विक तनाव के समय अक्सर ऐसे तत्व सक्रिय होने का मौका ढूंढ लेते हैं, जिससे आम जनता को बेवजह परेशानी होती है और महंगाई बढ़ती है। ऐसे तत्वों के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई करने के लिए राज्यों को अधिकार दिए गए हैं।

यह भी बताया गया कि पीएम ने आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की। इसमें लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को मजबूत करने के उपाय भी शामिल थे, खासकर ऐसे उत्पादों के लिए जो दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने में समय लेते हैं। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया, ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में तुरंत और प्रभावी ढंग से कार्रवाई की जा सके। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब देश और दुनिया दोनों ही आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।