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हिमाचल कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर मंथन, प्रभारी रजनी पाटिल से सीएम और मंत्रियों की मुलाकात

Written by:Neha Sharma
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हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल के साथ मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और कई कैबिनेट मंत्रियों ने वन टू वन मुलाकात की।
हिमाचल कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर मंथन, प्रभारी रजनी पाटिल से सीएम और मंत्रियों की मुलाकात

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल के साथ मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और कई कैबिनेट मंत्रियों ने वन टू वन मुलाकात की। इस दौरान प्रदेश में जल्द नया कांग्रेस अध्यक्ष घोषित करने और कार्यकारिणी गठन की जरूरत पर चर्चा हुई। कुछ विधायक भी पाटिल से मिले और उन्होंने भी प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर अपनी राय रखी। रजनी पाटिल इन चर्चाओं की रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को सौंपेंगी।

हिमाचल कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर मंथन

शनिवार सुबह शिमला के चौड़ा मैदान स्थित एक निजी होटल में सीएम सुक्खू और पाटिल की करीब घंटेभर मुलाकात हुई। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के कामकाज की रिपोर्ट प्रभारी को सौंपी। हालांकि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए किसी का नाम सुझाने से इनकार किया और कहा कि उनके लिए सभी नेता बराबर हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, कृषि मंत्री चंद्र कुमार समेत कई अन्य मंत्रियों ने भी अलग-अलग पाटिल से मुलाकात कर संगठन को लेकर सुझाव दिए।

सीएम सुक्खू ने बैठक के बाद कहा कि पार्टी को मजबूत बनाने और जनता के मुद्दे उठाने पर चर्चा हुई। विधानसभा की कार्यवाही के चलते वह दो दिन से पाटिल से नहीं मिल पाए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में अब कोई गुटबाजी नहीं है और सभी नेता कांग्रेस की विचारधारा के साथ खड़े हैं। प्रदेश अध्यक्ष जिसे भी बनाया जाएगा, पार्टी का पूरा समर्थन रहेगा। बैठक के बाद रजनी पाटिल दिल्ली लौट गईं।

इसी बीच विधानसभा में विपक्ष पर हमला बोलते हुए सीएम सुक्खू ने कहा कि भाजपा दोहरी राजनीति कर रही है। नियम 67 के तहत प्रस्ताव भाजपा विधायक लेकर आए थे, जबकि कांग्रेस ने नियम 130 के तहत आपदा पर चर्चा कराई। चार दिन की चर्चा के बाद जब सरकार की ओर से जवाब देने की बारी आई तो भाजपा विधायक वाकआउट कर गए। उन्होंने कहा कि केंद्र से कोई विशेष राहत पैकेज नहीं मिला, जबकि राज्य सरकार घर बनाने के लिए सात लाख रुपये तक, कपड़े और सामान के लिए 70 हजार रुपये और कच्चा घर टूटने पर 25 हजार से एक लाख रुपये तक की मदद दे रही है। इतना पैकेज किसी और राज्य में नहीं दिया गया है।

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