हिमाचल प्रदेश सरकार ने जमाबंदी सेवा को पूरी तरह ऑनलाइन करने का बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में ऑनलाइन मिलने वाली जमाबंदी पर पटवारी के डिजिटल हस्ताक्षर होंगे। पहले जमाबंदी ऑनलाइन निकलने के बाद उसे अपडेट कराने के लिए लोगों को पटवारी के पास जाकर हस्ताक्षर और मुहर लगवानी पड़ती थी। लेकिन नई व्यवस्था में ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर आवेदन करने के बाद पटवारी इसी पोर्टल पर इसे अपडेट करेगा और डिजिटल साइन लगाएगा। इसके लिए केवल 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इस कदम से लोगों को पटवारखानों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और सेवा पारदर्शी व तेज होगी।
मंत्रिमंडल ने लिए बड़े फैसले
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शुक्रवार को विधानसभा परिसर में हुई मंत्रिमंडल बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में एसएमसी शिक्षकों को नियमित करने के मुद्दे पर चर्चा की गई और मानसून सत्र में कैग रिपोर्ट सदन में रखने पर भी सहमति बनी। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि राजस्व विभाग के सारे रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इसके तहत जल्द ही जमाबंदी, इंतकाल और मुसाबी भी ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। यह सुविधा शुरू होने से लोगों को समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
मंत्रिमंडल बैठक में हिमाचल प्रदेश नगरपालिका संशोधन अध्यादेश 2025 को भी विधेयक के रूप में सदन में लाने का फैसला हुआ। इस विधेयक के तहत नवगठित नगर निकायों के चुनाव गठन के दो साल बाद कराने का प्रावधान होगा। इसके साथ ही राजस्व विभाग में पंजीकरण और कराधान विधेयक को भी सदन में पेश करने की मंजूरी दी गई। इन संशोधनों से स्थानीय निकायों के गठन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में स्थिरता आने की उम्मीद है।
बैठक में हिमाचल प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) को वित्तीय मदद देने पर भी फैसला लिया गया। सरकार ने एचपीपीसीएल को 957 करोड़ रुपये का कर्ज लेने के लिए गारंटी देने की मंजूरी दी है। राज्य सरकार का मानना है कि इस कदम से पावर प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को बल मिलेगा। इस तरह कैबिनेट के फैसलों से राजस्व, शिक्षा, ऊर्जा और शहरी निकायों के स्तर पर बड़े बदलाव लागू होंगे।





