हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में विपक्ष के वाकआउट पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जब भाजपा सत्ता में थी, तब कर्मचारियों पर लाठीचार्ज और पानी की बौछार की गई, पुरानी पेंशन बहाल नहीं की गई और अब विपक्ष में आने के बाद कर्मचारियों की याद आ रही है। सीएम ने आरोप लगाया कि आज भाजपा केवल कर्मचारियों के नाम पर वाकआउट कर ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद ही पहली कैबिनेट में पुरानी पेंशन बहाल की गई और अब तक 11 प्रतिशत डीए भी दिया गया है। जबकि भाजपा सरकार अपने कार्यकाल में 10 हजार करोड़ की वेतन आयोग देनदारी छोड़कर चली गई थी।
विपक्ष के वाकआउट पर सीएम सुक्खू का पलटवार
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आगे कहा कि भाजपा शासनकाल में प्रदेश को 8,000 करोड़ रुपये से कम का राजस्व घाटा अनुदान कभी नहीं मिला, लेकिन उनकी सरकार के समय यह पहले 6,000 करोड़ और अब घटकर 3,200 करोड़ रह गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने 1,600 करोड़ के अतिरिक्त उधार को भी रोका। कर्मचारियों को तीन प्रतिशत डीए देने का आश्वासन देते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के पास एनपीएस का 9,000 करोड़ रुपये फंसा हुआ है, जिसमें से 4,500 करोड़ कर्मचारियों का और बाकी प्रदेश सरकार का है। सीएम ने आरोप लगाया कि भाजपा की नीतियों के चलते प्रदेश के आर्थिक संस्थान भी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार का ध्यान आपदा प्रभावितों की मदद और बंद पड़ी सड़कों को खोलने पर है, उसके बाद कर्मचारियों की देनदारियों को कम किया जाएगा।
बिजली बिलों के मुद्दे पर भी सीएम ने गंभीरता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब स्मार्ट और प्रीपेड बिजली मीटर लगाए जाएंगे ताकि बिलों में पारदर्शिता बनी रहे। सीएम ने बताया कि विधायक रघुवीर सिंह बाली का 14 महीनों का बिजली बिल 6.78 लाख रुपये आया था, जबकि वे उस कोठी में रहते भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह बिल उनसे भी ज्यादा था, क्योंकि उनका खुद का बिल 3.80 लाख रुपये जारी किया गया था। बाद में जांच में पता चला कि बाली का सही बिल 1.68 लाख और सीएम कार्यालय का 1.40 लाख बनता है। सीएम ने कहा कि बिजली बोर्ड ने बताया है कि यह बिल लोक निर्माण विभाग की ओर से दिए जाते हैं और सभी पुराने बिलों की भी जांच की जाएगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था लगातार सुधर रही है और सरकार की प्राथमिकता आपदा प्रबंधन के साथ-साथ कर्मचारियों व जनता की समस्याओं का हल निकालना है। उन्होंने विपक्ष पर केवल राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा का असली उद्देश्य जनता का भला करना नहीं बल्कि भ्रम फैलाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश सरकार कठिन परिस्थितियों से उबरते हुए कर्मचारियों और आम लोगों के हित में फैसले लेती रहेगी।





