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CM सुक्खू ने वित्त मंत्री सीतारमण से मांगा हिमाचल के लिए विशेष पैकेज, ₹10,000 करोड़ के अनुदान की अपील

Written by:Rishabh Namdev
Published:
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए विशेष आर्थिक पैकेज, न्यूनतम ₹10,000 करोड़ का राजस्व घाटा अनुदान और पहाड़ी राज्यों के लिए एक अलग 'ग्रीन फंड' बनाने का आग्रह किया।
CM सुक्खू ने वित्त मंत्री सीतारमण से मांगा हिमाचल के लिए विशेष पैकेज, ₹10,000 करोड़ के अनुदान की अपील

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इस बैठक में उन्होंने राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और वित्तीय चुनौतियों का हवाला देते हुए केंद्र से उदार वित्तीय सहयोग की मांग की। सीएम सुक्खू ने एक विशेष आर्थिक पैकेज के साथ कई अहम मुद्दों पर वित्त मंत्री का ध्यान आकर्षित किया।

मुख्यमंत्री ने 16वें वित्त आयोग को सौंपे गए ज्ञापन का जिक्र करते हुए कहा कि हिमाचल के लिए राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) में लगातार कमी आई है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने इस अनुदान को न्यूनतम 10,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित करने का आग्रह किया।

पहाड़ी राज्यों के लिए ‘ग्रीन फंड’ का प्रस्ताव

सीएम सुक्खू ने देश के पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में हिमाचल और अन्य हिमालयी राज्यों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने पहाड़ी राज्यों के लिए सालाना 50,000 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ एक अलग ‘ग्रीन फंड’ गठित करने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्य देश के ‘ग्रीन फ्रंटियर्स’ हैं और इनका संरक्षण राष्ट्रीय हित में है।

इसके अलावा, उन्होंने होरिजेंटल डिवेल्यूवेशन (Horizontal Devolution) के फॉर्मूले में संशोधन की भी मांग की। उन्होंने कहा कि हिमाच्छादित और शीत मरुस्थलीय क्षेत्रों को भी सघन वनों की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि ये क्षेत्र भी पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आपदा जोखिम सूचकांक और कर्ज की सीमा पर चर्चा

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने 15वें वित्त आयोग द्वारा विकसित आपदा जोखिम सूचकांक (DRI) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि हिमालयी क्षेत्रों की तुलना मैदानी इलाकों से करना उचित नहीं है। उन्होंने पहाड़ी राज्यों के लिए विशिष्ट संकेतकों के आधार पर एक अलग DRI और पृथक बजटीय आवंटन की मांग की, ताकि आपदा राहत के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित हो सकें।

राज्य की वित्तीय क्षमताओं को मजबूत करने के लिए, मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री से राज्य की जीएसडीपी (GSDP) का अतिरिक्त 2 प्रतिशत ऋण लेने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया। उन्होंने केंद्र से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि 16वें वित्त आयोग की अवधि के दौरान राज्यों के राजस्व और व्यय का आकलन यथार्थवादी हो।

इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री के साथ उनके प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार और सचिव राकेश कंवर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।