हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्वास्थ्य विभाग की औषधि नियंत्रक विंग और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। टीम ने नूरपुर क्षेत्र के लोधवां स्थित एक दवा फैक्टरी को सील कर दिया, जहां बिना लाइसेंस दवाइयों का निर्माण किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान फैक्टरी से 23 हजार इंजेक्शन जब्त किए गए, जिनका उत्पादन अवैध रूप से किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि फैक्टरी का लाइसेंस दिसंबर 2024 में ही निरस्त कर दिया गया था, इसके बावजूद संचालक गुप्त रूप से दवाइयों का निर्माण कर रहा था।
बिना लाइसेंस दवा फैक्टरी सील
ड्रग इंस्पेक्टर प्यार चंद ठाकुर ने जानकारी दी कि विभाग ने कंपनी को पहले ही साफ चेतावनी दी थी कि लाइसेंस निरस्त होने के बाद किसी भी प्रकार का उत्पादन गैरकानूनी होगा। इसके बावजूद फैक्टरी प्रबंधन ने नियमों की अनदेखी की और चोरी-छिपे उत्पादन जारी रखा। निरीक्षण के दौरान जब टीम ने फैक्टरी में मशीनें चलती देखीं और दवाइयों के पैकेट तैयार होते पाए, तो तुरंत फैक्टरी को सील कर दिया गया।
फैक्टरी में बरामद की गई दवाइयों और इंजेक्शनों को टीम ने जब्त कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का उत्पादन न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि लोगों की सेहत के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। बिना गुणवत्ता जांच के तैयार की गई दवाइयां मरीजों के जीवन को खतरे में डाल सकती हैं। इसी वजह से ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार अवैध दवा निर्माण पर निगरानी बढ़ा रहे हैं। औषधि नियंत्रक विंग ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस निरस्त होने या बिना अनुमति दवा उत्पादन करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। आरोपी फैक्टरी संचालक के खिलाफ नियमों के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। विभाग का कहना है कि आम जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस तरह की फैक्ट्रियों पर लगातार छापेमारी जारी रहेगी।





