शिमला: हिमाचल प्रदेश में डेयरी सेक्टर को एक नई दिशा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सोमवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की उपस्थिति में प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच तीन अहम समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का लक्ष्य राज्य में दूध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाना है।
इन समझौता ज्ञापनों पर प्रदेश सरकार की ओर से पशुपालन सचिव रितेश चौहान और हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक प्रसंघ समिति (मिल्कफेड) के प्रबंध निदेशक अभिषेक वर्मा ने हस्ताक्षर किए। वहीं, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड का प्रतिनिधित्व बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने किया।
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कांगड़ा में 250 करोड़ का ऑटोमेटिक प्लांट
इस समझौते के तहत सबसे बड़ी परियोजना कांगड़ा जिले के ढगवार में स्थापित की जा रही है। यहां 250 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक और स्वचालित दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र का निर्माण होगा। शुरुआत में इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 1.50 लाख लीटर दूध संसाधित करने की होगी, जिसे भविष्य में मांग के अनुसार तीन लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकेगा। कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार के अनुसार, यह प्लांट इसी वर्ष अक्टूबर माह तक शुरू हो जाएगा।
“कांगड़ा जिला में ढगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट बनने के बाद ‘हिम’ ब्रांड के गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बाजार में उतारे जाएंगे। हिमाचल प्रदेश दूध खरीद पर सबसे अधिक समर्थन मूल्य देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।”- सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री
क्या हैं तीन प्रमुख समझौते?
हस्ताक्षरित किए गए तीन समझौता ज्ञापन राज्य की डेयरी अधोसंरचना को व्यापक रूप से बेहतर बनाएंगे:
पहला MoU: इसके तहत कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चंबा जिलों को मिलाकर एक नई ‘कांगड़ा मिल्क यूनियन’ का गठन और संचालन किया जाएगा। इससे इन जिलों में दूध संग्रहण और विपणन की प्रक्रिया और सुदृढ़ होगी।
दूसरा MoU: नाहन और नालागढ़ में 20-20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दो नए दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, हमीरपुर के जलाड़ी और ऊना के झलेड़ा में 20-20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले दो दुग्ध अभिशीतन केंद्र (Milk Chilling Centers) भी बनेंगे।
तीसरा MoU: मिल्कफेड के कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) सॉफ्टवेयर लागू किया जाएगा। इससे दूध उत्पादक किसानों का रिकॉर्ड व्यवस्थित होगा और उन्हें समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
‘अमूल’ की तर्ज पर ‘हिम’ ब्रांड होगा विकसित
कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार ‘हिम’ ब्रांड को वेरका और अमूल की तरह एक राष्ट्रीय पहचान दिलाना चाहती है। उन्होंने कहा, “हमें अपने उत्पादों को वेरका और अमूल की तर्ज पर आगे बढ़ाना होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसानों को अच्छी नस्ल के दुधारू पशु खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेगी ताकि दूध की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार हो सके। इस मौके पर मिल्कफेड के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।