हिमाचल प्रदेश में मनरेगा और निर्माण कार्यों से जुड़े मजदूरों ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। मंडी में सीटू (CITU) से संबंधित मनरेगा और भवन एवं अन्य सन्निर्माण मजदूर यूनियन की राज्य स्तरीय बैठक में 12 फरवरी को प्रदेश के सभी ब्लॉक मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया है।
यूनियन ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून की जगह लाए गए नए प्रावधानों और चार श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए इन्हें रद्द करने की मांग की है। बैठक की अध्यक्षता राज्य अध्यक्ष जोगिंदर कुमार ने की, जिसमें सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंदर मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
केंद्र के नए कानून के खिलाफ गांव-गांव अभियान
यूनियन ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक विस्तृत आंदोलन की रणनीति तैयार की है। इसके तहत 20 जनवरी से पूरे प्रदेश में गांव-गांव जाकर मजदूरों के बीच जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान बैठकें आयोजित की जाएंगी और पर्चे बांटकर मजदूरों को नए कानूनों के कथित दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसी आंदोलन के तहत 12 फरवरी को खंड स्तर पर जोरदार प्रदर्शन किए जाएंगे।
श्रमिक कल्याण बोर्ड पर 500 करोड़ रोकने का आरोप
बैठक में राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि बोर्ड ने एक लाख से अधिक मजदूरों की लगभग 500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता लंबे समय से रोक रखी है।
नेताओं ने दावा किया कि इस वित्तीय वर्ष में बोर्ड ने केवल 30 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की है। यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि इसमें से 10 करोड़ रुपये की राशि 12 दिसंबर को मंडी में हुए सरकार के तीन साल पूरे होने के जश्न कार्यक्रम पर खर्च कर दी गई, जबकि पात्र मजदूर अपनी सहायता के लिए भटक रहे हैं। यूनियन का आरोप है कि बोर्ड के पैसे का इस्तेमाल राजनीतिक रैलियों के लिए किया जा रहा है।
राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए प्रतिनिधि चयनित
बैठक के दौरान राजस्थान में 6 से 8 फरवरी तक होने वाले ‘निर्माण फेडरेशन’ के राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए हिमाचल प्रदेश से प्रतिनिधियों का भी चयन किया गया। इनमें हमीरपुर से जोगिंदर कुमार और संतोष कुमार, शिमला से अमित कुमार और मंडी से भूपेंद्र सिंह शामिल हैं। वहीं, प्रेम गौतम केंद्रीय कमेटी के पदाधिकारी के तौर पर इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यूनियन ने प्रदेश में BRO और नेशनल हाईवे जैसी परियोजनाओं में काम कर रहे लाखों प्रवासी मजदूरों को भी संगठन से जोड़ने का फैसला किया है।





