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हिमाचल में NTT भर्ती अटकी, 10 हजार में सिर्फ 14 उम्मीदवार ही निकले पात्र, शिक्षा मंत्री ने दिया ये आदेश

Written by:Neha Sharma
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हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षक (एनटीटी) भर्ती प्रक्रिया में बड़ा पेंच फंस गया है। इसके लिए करीब 10 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, लेकिन जांच के बाद इनमें से केवल 14 उम्मीदवार ही पात्र पाए गए हैं।
हिमाचल में NTT भर्ती अटकी, 10 हजार में सिर्फ 14 उम्मीदवार ही निकले पात्र, शिक्षा मंत्री ने दिया ये आदेश

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षक (एनटीटी) भर्ती प्रक्रिया में बड़ा पेंच फंस गया है। राज्य इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन के माध्यम से शुरू की गई इस भर्ती में कुल 6,297 पदों को भरने का जिम्मा 14 अलग-अलग कंपनियों को सौंपा गया था। इसके लिए करीब 10 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, लेकिन जांच के बाद इनमें से केवल 14 उम्मीदवार ही पात्र पाए गए हैं। यह स्थिति तब सामने आई है जब शिक्षा विभाग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि भर्ती प्रक्रिया एनसीटीई (नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन) के नियमों के तहत होगी।

हिमाचल में NTT भर्ती अटकी

इन नियमों के मुताबिक अभ्यर्थी के पास दो साल का एनटीटी डिप्लोमा होना जरूरी है और यह डिप्लोमा मान्यता प्राप्त संस्थान से किया गया होना चाहिए। लेकिन प्रदेश में अधिकतर उम्मीदवारों के पास सिर्फ एक साल का डिप्लोमा है। वहीं कुछ अभ्यर्थियों के डिप्लोमा ऐसे संस्थानों से जारी हुए हैं जिन्हें एनसीटीई की मान्यता ही प्राप्त नहीं है। ऐसे कई संस्थानों को हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग पहले ही बंद कर चुका है।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने दिया ये आदेश

जानकारी के अनुसार, पहले राज्य इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ने अभ्यर्थियों का चयन कर नियुक्ति आदेश जारी कर दिए थे, लेकिन जब शिकायतें सामने आईं तो शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने सभी प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच के आदेश दिए। शिक्षा विभाग ने कॉर्पोरेशन से पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी मांगी है।

नियामक आयोग ने करीब चार साल पहले आठ संस्थानों को बंद किया था और छात्रों को 9 प्रतिशत ब्याज सहित फीस लौटाने का आदेश दिया था। ये सभी संस्थान एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर मेरठ से एमओयू साइन करने के बाद चल रहे थे और कुल 17 संस्थान इसी से संबद्ध पाए गए थे। आयोग के मुताबिक, इन संस्थानों में प्रशिक्षण गुणवत्ता और मान्यता मानकों का पालन नहीं किया गया था।

इस पूरे विवाद पर अब मामला केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय तक पहुंच गया है। राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा ने केंद्र से नियमों में आंशिक राहत की मांग की है। उन्होंने तर्क दिया कि हिमाचल के अभ्यर्थियों ने एक साल का कोर्स किया है, इसलिए उन्हें ब्रिज कोर्स करने की अनुमति दी जाए, जिसे डाइट केंद्रों में आयोजित किया जा सके। प्रस्ताव केंद्र को भेजा जा चुका है, लेकिन अभी छूट को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि भर्ती एनसीटीई नियमों के तहत ही होगी और यदि केंद्र से छूट मिलती है, तो प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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