मध्य प्रदेश में मूंग की सरकारी खरीद को लेकर किसानों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा में किसानों ने अपनी मांग को अलग अंदाज में उठाते हुए मूंग की बोरी को दूल्हे की तरह सजाया और खुद बाराती बनकर तहसील कार्यालय तक बारात निकाली।
भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में किसानों का कहना था कि सरकार की मौजूदा खरीद व्यवस्था उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं दिला पा रही है। उनका आरोप है कि सीमित मात्रा में खरीद होने के कारण उन्हें अपनी अधिकतर फसल खुले बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही है। किसानों ने कहा कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
मूंग खरीद नीति पर किसानों की नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि सरकार केवल सीमित मात्रा में ही मूंग की खरीद कर रही है। उनका आरोप है कि प्रति एकड़ करीब 1.2 क्विंटल की सीमा तय होने से अधिकांश उपज सरकारी खरीद से बाहर रह जाती है। ऐसे में किसानों को मजबूरी में अपनी फसल व्यापारियों को कम कीमत पर बेचनी पड़ती है।
किसानों के मुताबिक मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,768 रुपये प्रति क्विंटल तय है, लेकिन खुले बाजार में उन्हें सिर्फ 6,000 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मिल रहा है। इससे हर क्विंटल पर उन्हें हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि जब उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, तब उचित दाम नहीं मिलने से खेती करना मुश्किल होता जा रहा है। उनका मानना है कि यदि सरकार पूरी उपज MSP पर खरीदे तो किसानों को राहत मिलेगी और उन्हें घाटे में फसल बेचने की नौबत नहीं आएगी।
किसानों ने यह भी कहा कि मूंग जैसी दलहनी फसलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रोत्साहित करती है, लेकिन जब खरीद की बात आती है तो सीमित खरीद किसानों की परेशानी बढ़ा देती है। उनका कहना है कि खेती तभी लाभ का सौदा बनेगी जब उत्पादन के साथ उसकी पूरी खरीद की भी गारंटी मिले।
भारतीय किसान यूनियन की चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन ने साफ कहा है कि यह प्रदर्शन सिर्फ शुरुआत है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द 100 प्रतिशत मूंग खरीद पर फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों ने 15 जुलाई को बघवाड़ा गांव में विधायक प्रेमशंकर वर्मा के निवास के बाहर सड़क जाम करने का ऐलान भी किया है।
किसान नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी तरह की अव्यवस्था फैलाना नहीं, बल्कि अपनी समस्या सरकार तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना है। इसलिए उन्होंने शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से “मूंग की बारात” निकालकर विरोध दर्ज कराया। इस प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं।
अब किसानों की निगाह सरकार के अगले कदम पर है। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो विवाद शांत हो सकता है, लेकिन यदि खरीद नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश के कई जिलों में आंदोलन और बड़े स्तर पर देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल मूंग खरीद का मुद्दा प्रदेश की कृषि राजनीति में एक बड़ा विषय बनता जा रहा है और हजारों किसान सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।






