दीवाली से पहले मनाया जाने वाला रूप चौदस जिसे नरक चतुर्दशी और छोटी दीवाली (Chhoti Diwali) भी कहा जाता है, यह त्यौहार यमराज की पूजा और दीपदान का पवित्र अवसर भी है। इस दिन यम दीपदान करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली नकारात्मकता और अकाल मृत्यु के योग दूर हो जाते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है और माना जाता है कि इस दीपक की रोशनी से घर में सुख, समृद्धि और दीर्घायु का वास होता है। यम दीप जलाने की सही विधि और समय का पालन करना बेहद जरूरी होता है, तभी इसका पूरा शुभ फल मिलता है। आइए जानें इस साल यम दीपदान करने का शुभ मुहूर्त और सही तरीका।यम का दीपक कैसे बनाएं

यम दीपदान का शुभ मुहूर्त और महत्व (Chhoti Diwali)

19 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 50 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 2 मिनट तक यम दीपदान का शुभ समय रहेगा। इस अवधि में मिट्टी या आटे का दीपक लेकर उसमें सरसों का तेल और चार बत्तियाँ लगाई जाती हैं। फिर इस दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में रखा जाता है। यह दीपक यमराज के नाम का दीपक कहलाता है, जिसे जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति आती है। यह दीपदान अकाल मृत्यु से रक्षा करता है और घर में समृद्धि, आरोग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद लाता है। अगले दिन यानी 20 अक्टूबर की सुबह 5 बजकर 13 मिनट से 6 बजकर 25 मिनट के बीच स्नान करने का विशेष महत्व है। यह स्नान न केवल शरीर को शुद्ध करता है बल्कि मन को भी सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

आटे के दीपक का धार्मिक और वास्तु महत्व

स्कंद पुराण के अनुसार रूप चौदस के दिन सूर्यास्त के बाद दक्षिण दिशा में आटे का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दीपक यमराज को प्रसन्न करने के लिए जलाया जाता है, जिससे व्यक्ति के जाने-अनजाने में हुए पाप नष्ट हो जाते हैं। माना जाता है कि इस दीपक की रोशनी से यमराज खुश होते हैं और अपने भक्तों को अकाल मृत्यु, बीमारियों और दुःखों से मुक्ति प्रदान करते हैं। इस परंपरा से घर का वातावरण पवित्र होता है और परिवार के सदस्यों पर आरोग्य, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद बना रहता है। इस रात यम दीप जलाकर श्रद्धा से प्रार्थना करने से जीवन में शांति और सुरक्षा का भाव बढ़ता है, और हर दिशा में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

यम दीपदान करते समय ध्यान देने योग्य बातें

  • दीया साफ और बड़ा हो।
  • चारों दिशाओं में बत्ती लगाई जाए।
  • तेल में सरसों का प्रयोग करें।
  • दीपक को दक्षिण दिशा की ओर रखें।
  • यमराज के मंत्र का जाप करें।
  • दीपक को पूर्ण रूप से जलाएं और बाद में ध्यानपूर्वक बुझाएं।
  • इन साधारण नियमों का पालन करने से यम दीपदान का पूरा धार्मिक और शुभ लाभ मिलता है।