नई दिल्ली/इंदौर: बैंकिंग सेक्टर में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर बैंक कर्मचारी यूनियनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बैनर तले हुई इस हड़ताल में सार्वजनिक, निजी, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों के 8 लाख से अधिक कर्मचारी शामिल हुए, जिससे देश भर में बैंकिंग कामकाज प्रभावित हुआ।
इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर मध्य प्रदेश के इंदौर में भी प्रमुखता से देखने को मिला। यहां बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और रैली निकाली। हाथों में बैनर-पोस्टर लिए कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और सरकार से जल्द फैसला लेने की अपील की।
क्यों उठी 5-डे वर्किंग की मांग?
बैंक यूनियनों का तर्क है कि जब केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकांश कार्यालयों में 5 दिन का सप्ताह लागू है, तो बैंकिंग क्षेत्र को इससे अलग क्यों रखा गया है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) जैसे वित्तीय संस्थानों में भी शनिवार और रविवार को अवकाश रहता है।
इसके अलावा, कई सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने भी 5-डे वर्किंग व्यवस्था को अपना लिया है। ऐसे में बैंक कर्मचारियों पर काम का बोझ कम करने और उन्हें बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस देने के लिए यह बदलाव बेहद जरूरी है।
इंदौर में गांधी हॉल के पास बड़ा प्रदर्शन
इंदौर में हड़ताली बैंककर्मियों का बड़ा जमावड़ा गांधी हॉल के पास हुआ। कर्मचारियों ने एक सुर में कहा कि यह उनकी जायज मांग है, जिसे सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है। UFBU के स्थानीय पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो भविष्य में सभी बैंककर्मी मिलकर और भी बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस एकदिवसीय हड़ताल को बैंक यूनियनों ने सरकार के लिए एक चेतावनी बताया है।





