मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज, 3 मई 2026 को 2360 करोड़ की लागत से बनने वाले इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के प्रथम चरण का भूमि-पूजन करने जा रहे हैं। 20 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर न केवल ट्रैफिक का दबाव कम करेगा, बल्कि मालवा क्षेत्र में निवेश के नए द्वार भी खोलेगा। 1300 हेक्टेयर में फैलने वाला यह प्रोजेक्ट लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरेगा। कार्यक्रम में शॉर्ट फिल्म के माध्यम से कॉरिडोर के स्वरूप, संभावनाओं और क्षेत्रीय प्रभावों को दिखाया जाएगा।
इससे औद्योगिक और वाणिज्यिक विस्तार के नए द्वार खुलेंगे। स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों अवसर पैदा कर मालवा अंचल की आर्थिक प्रगति को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। बता दें कि फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) ने 2360 करोड़ रुपये के इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को मंजूरी दी थी।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
- परियोजना के अंतर्गत सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर निवेश क्षेत्र तक लगभग 20.28 किलोमीटर लंबाई का मार्ग विकसित किया जा रहा है।
- लगभग 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में नियोजित विकास का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए कुल 2360 करोड़ रु. की लागत निर्धारित की गई है।
- अधोसंरचना के तहत 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क तथा उसके दोनों ओर विकसित होने वाला बफर ज़ोन इस कॉरिडोर को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विस्तार योग्य बनाएगा।
- कॉरिडोर के दोनों ओर 3 से 5 किलोमीटर के दायरे में एक विशाल औद्योगिक जोन विकसित किया जाएगा। कुल 1290.74 हेक्टेयर (लगभग 3200 एकड़) भूमि का विकास प्रस्तावित है।
- यह 21 किलोमीटर लंबा और 8 लेन चौड़ा कॉरिडोर इंदौर से शुरू होकर सीधे पीथमपुर के एबी रोड से जुड़ेगा।
- यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-47 और राष्ट्रीय राजमार्ग-52 के बीच प्रभावी कनेक्टिविटी स्थापित करते हुए औद्योगिक परिवहन को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाएगा।
क्या मिलेगा लाभ?
- यह परियोजना इंदौर क्षेत्र में संतुलित शहरीकरण और अधोसंरचना आधारित विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।
- इंदौर एयरपोर्ट के समीप सुपर कॉरिडोर को पीथमपुर निवेश क्षेत्र से सीधे जोड़ेगा।
- यह औद्योगिक इकाइयों के लिए लागत में कमी, समय की बचत और सप्लाई चेन की दक्षता में सुधार होगा, जो निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
- पीथमपुर निवेश क्षेत्र, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क, पीएम मित्र पार्क और विक्रम उद्योगपुरी जैसे प्रमुख औद्योगिक स्थानों को एकीकृत रूप में जोड़ते हुए औद्योगिक नेटवर्क तैयार करेगा।
- इसके माध्यम से न केवल औद्योगिक इकाइयों को बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स, परिवहन और बाजार तक पहुंच भी अधिक प्रभावी बनेगी।
- यह परियोजना इंदौर क्षेत्र में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स को एकीकृत कर निवेश के लिए एक संगठित और सक्षम वातावरण तैयार करेगी।
- इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के माध्यम से पीथमपुर निवेश क्षेत्र, लॉजिस्टिक हब, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को एकीकृत कनेक्टिविटी प्राप्त होगी।
- बड़े निवेश प्रस्तावों को गति मिलेगी और प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार अधिक सुव्यवस्थित ढंग से हो सकेगा।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए भी बड़े उद्योगों के साथ जुड़कर आगे बढ़ने के अवसर विकसित होंगे।
- यह कॉरिडोर इंदौर को आईटी और फिनटेक गतिविधियों के लिए एक सशक्त स्थान के रूप में स्थापित करने की दिशा में सहायक सिद्ध होगा।
- मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी विकास की गति तेज होने की संभावनाएं हैं।
- प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और इंदौर की स्थापित औद्योगिक पहचान को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना विभिन्न सेक्टरों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करती है।
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, तेज कनेक्टिविटी और नियोजित अधोसंरचना उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाएगी, जिससे प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर सकेगा।
- इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर, उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन में एक महत्वपूर्ण विकास धुरी के रूप में कार्य करेगा।






