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खुद ने रची अपने अपहरण की कहानी, वजह जानकर आप हो जाएंगे हैरान, पुलिस ने भेजा सलाखों के पीछे

Written by:Atul Saxena
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पुलिस पूछताछ में सामने आया कि कार से कोई आमदनी नहीं हो रही थी और कर्ज देने वाले पैसे वापस मांग रहे थे। ऐसे में यश ने कार को गिरवी रख दिया और पैसे की जुगाड़ के लिए खुद के अपहरण की झूठी कहानी बना डाली।
खुद ने रची अपने अपहरण की कहानी, वजह जानकर आप हो जाएंगे हैरान, पुलिस ने भेजा सलाखों के पीछे

इंदौर में बाणगंगा थाना क्षेत्र में युवक के अपहरण की गुत्थी सुलझ गई है लेकिन जो सच सामने आया है, उसने सबको हैरान कर दिया है। जिस युवक के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज हुई थी, उसी ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर ये पूरी साजिश रची थी।

एडिशनल डीसीपी रामस्नेही मिश्रा ने बताया कि इंदौर के बाणगंगा थाने में फरियादी आनंद राठौर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके बेटे यश राठौर को बदमाशों ने अपहरण कर लिया है और फिरौती के लिए 3 लाख की मांग की गई है, अपहरण की सनसनीखेज वारदात सुनकर पुलिस के कान खड़े हो गये।

कर्ज में डूबे युवक ने रची अपने ही अपहरण की कहानी 

पुलिस ने जब जाँच शुरू की तो सामने आया कि बदमाश राहुल मेहरा ने अपने साथियों आदर्श और धर्मेंद्र के साथ मिलकर इस झूठे अपहरण की पटकथा लिखी, वजह थी कर्ज में डूबा यश,जिसने अपने ही माता-पिता से 3 लाख रुपये वसूलने के लिए खुद के ही अपहरण की योजना बनाई।

पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तार किया 

इसके बाद पुलिस जांच में मामला संदिग्ध लगने पर जब तकनीकी साक्ष्य खंगाले गए, तो साजिश की परतें खुलने लगीं। आखिरकार राहुल और उसके साथी पुलिस की गिरफ्त में हैं और अब उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है।

कार को भी रख दिया था गिरवी,परिवार से बोला था झूठ 

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि फरियादी का बेटा यश फाइनेंस का काम करता है और कर्ज हो गया था, यश राठौड़ द्वारा अपने परिवार को बिना बताए कार को भी गिरवी रख दिया था, बहुत से लोगों से उधार लेने के कारण वह पैसों की मांग कर रहे थे इसलिए यश ने अपने साथी राहुल मेहरा, आदर्श और धर्मेंद्र लोधी के साथ मिलकर अपहरण की साजिश रची, पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेज दिया है।

इंदौर से शकील अंसारी की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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