मध्य प्रदेश कांग्रेस में अनुशासन और रणनीति को लेकर बुलाई गई एक महत्वपूर्ण बैठक हंगामे और विवाद की भेंट चढ़ गई। मंगलवार को इंदौर में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की मौजूदगी में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद कांग्रेस कार्यालय में भोजन को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई, जिससे अफरातफरी का माहौल बन गया।
यह घटनाक्रम उस वक्त हुआ जब पार्टी मालवा-निमाड़ क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर मंथन कर रही थी। लेकिन बैठक के बाद की अव्यवस्था ने पार्टी के संगठनात्मक अनुशासन पर ही सवाल खड़े कर दिए।
निष्क्रिय कार्यकर्ताओं पर बरसे प्रदेश प्रभारी
बैठक के दौरान कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने निष्क्रिय पड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं पर बेहद सख्त टिप्पणी की। उन्होंने दो टूक कहा कि जो लोग जनता के बीच नहीं जा रहे हैं और पार्टी के लिए काम नहीं कर रहे हैं, वे कांग्रेस के नहीं बल्कि बीजेपी के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं।
“जो नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच नहीं जा रहे, वे पार्टी के नहीं बल्कि बीजेपी के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं।” — हरीश चौधरी, प्रदेश प्रभारी, कांग्रेस
चौधरी ने सभी पदाधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अब घर बैठने का समय नहीं है और सभी को सक्रिय होकर मैदान में उतरना होगा। उनके इस बयान से पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है।
मालवा-निमाड़ में इंदौर बनेगा कांग्रेस का केंद्र
विवाद और हंगामे से पहले हुई बैठक में कांग्रेस ने मालवा-निमाड़ में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक नई रणनीति तैयार की। पार्टी ने तय किया है कि इंदौर को केंद्र बनाकर पूरे क्षेत्र में संगठन को सक्रिय किया जाएगा। इस बैठक में शहर की 9 विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने और बूथ स्तर से अभियान शुरू करने पर जोर दिया गया। बैठक में शहर कार्यकारिणी के सदस्य, विभिन्न मोर्चा संगठनों के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी शामिल हुए थे।
रणनीति पर भारी पड़ी अव्यवस्था
भले ही बैठक का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना था, लेकिन इसके समापन के बाद जो दृश्य देखने को मिला, उसने पार्टी की तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिया। भोजन वितरण के दौरान कार्यकर्ताओं के बीच ऐसी धक्का-मुक्की हुई कि वरिष्ठ नेताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा। इस अव्यवस्था ने पार्टी की रणनीति और अनुशासन की बातों को फीका कर दिया।






