इंदौर में लंबे समय से ट्रैफिक दबाव झेल रहे लवकुश चौराहे पर अब राहत की शुरुआत होने जा रही है। दरअसल इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) अगले सप्ताह डबल डेकर फ्लाईओवर की एक लेन आम यातायात के लिए खोल देगा। इस लेन के शुरू होते ही अरविंदो अस्पताल और उज्जैन रोड की दिशा से आने वाले वाहन बिना ट्रैफिक सिग्नल पर रुके सीधे बाणगंगा, मरीमाता और सांवेर रोड की ओर जा सकेंगे। इससे रोजाना हजारों वाहन चालकों का समय बचेगा और चौराहे पर लगने वाले लंबे जाम में कमी आने की उम्मीद है।
दरअसल आईडीए के मुताबिक पहली लेन को ट्रायल ऑपरेशन के रूप में खोला जाएगा। वहीं लोड टेस्ट पूरा होने और सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद इसे चालू करने का फैसला लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह चरणबद्ध तरीके से ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने की दिशा में पहला बड़ा कदम होगा।
अब ट्रायल ऑपरेशन की तैयारी
दरअसल आईडीए ने अरविंदो से बाणगंगा की ओर जाने वाली भुजा का लोड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। सुरक्षा मानकों की मंजूरी मिलने के बाद अब इस हिस्से को ट्रैफिक के लिए खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि इस लेन पर अभी लाइटिंग और कुछ फिनिशिंग कार्य बाकी हैं, लेकिन इन्हें यातायात शुरू होने के साथ-साथ पूरा किया जाएगा। आईडीए सीईओ परीक्षित झाड़े ने बताया कि पहले चरण में एक भुजा को टेस्टिंग अवधि के लिए खोला जाएगा ताकि ट्रैफिक का व्यवहार और संरचना की कार्यक्षमता देखी जा सके। यदि सब कुछ सामान्य रहा तो आगे दोनों दिशाओं में यातायात शुरू किया जाएगा।
वाहनों को लवकुश चौराहे पर रुकना नहीं पड़ेगा
वहीं फ्लाईओवर खुलने के बाद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उज्जैन रोड से आने वाले वाहनों को लवकुश चौराहे पर रुकना नहीं पड़ेगा। इससे न केवल यात्रा समय कम होगा बल्कि नीचे की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। आईडीए का अनुमान है कि चौराहे पर वाहनों का दबाव करीब 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। बारिश के दौरान जलभराव और उससे बनने वाले जाम में भी राहत मिलने की संभावना है।
दूसरी लाइन दिसंबर तक पूरी होगी
फ्लाईओवर की दूसरी लाइन, जो बाणगंगा से अरविंदो की दिशा में जाएगी, अभी निर्माणाधीन है। आईडीए ने इसे 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस हिस्से का लगभग 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और फिलहाल स्लैब डालने, डामरीकरण और अंतिम फिनिशिंग का काम चल रहा है। 1454 मीटर लंबे इस डबल डेकर फ्लाईओवर पर कुल 24 स्पान बनाए गए हैं, जिन पर 247 प्रीकास्ट सेगमेंट लगाए गए हैं। परियोजना में लगभग 30 हजार टन सीमेंट और स्टील का उपयोग किया गया है। एक-एक सेगमेंट का वजन करीब 120 टन है। मेट्रो लाइन के ऊपर 65 मीटर लंबी और 400-400 टन वजनी दो बड़ी ब्रिजिंग संरचनाएं भी लगाई गई हैं।
दरअसल यह फ्लाईओवर इंदौर का पहला ऐसा चौराहा होगा जहां चारों दिशाओं में फ्लाईओवर की भुजाएं होंगी और नीचे मेट्रो लाइन भी संचालित होगी। परियोजना की कुल लागत करीब 175 करोड़ रुपये है और इसे शहर की सबसे महत्वपूर्ण ट्रैफिक सुधार परियोजनाओं में गिना जा रहा है।






