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इंदौर मेट्रो में मुफ्त सफर खत्म होते ही लोगों ने किया किनारा, यात्रियों की संख्या 50% से ज्यादा गिरी, जानें वजहें

Written by:Ronak Namdev
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इंदौर मेट्रो में मुफ्त यात्रा खत्म होने के बाद यात्रियों की संख्या में 50% से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई है। पहले हफ्ते 50,000 लोग सफर कर रहे थे, अब ये आंकड़ा 20,000 से नीचे आ गया है। किराए, रूट सीमितता और बस-ऑटो की तुलना में कम पहुंच जैसी वजहें इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही हैं।
इंदौर मेट्रो में मुफ्त सफर खत्म होते ही लोगों ने किया किनारा, यात्रियों की संख्या 50% से ज्यादा गिरी, जानें वजहें

मई 2025 को 6.3 किमी के सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर पर कमर्शियल सेवा शुरू करने के बाद शुरुआती हफ्ते में मुफ्त सुविधा से 50,000 से अधिक लोग ने सफर किया, लेकिन 8 जून से किराया लागू होने के बाद यात्री संख्या 20,000 से नीचे आ गई। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अनुसार, किराया 20-30 रुपये है। लोग कहते हैं कि छोटा रूट और कम स्टेशन होने से वे बस या ऑटो चुन रहे हैं। डिस्काउंट स्कीम शुरू की गई, मगर इसका असर सीमित रहा।

मेट्रो का कॉरिडोर गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर स्टेशन नंबर 3 तक है, जिसमें 5 स्टॉप हैं। किराया लागू होने के बाद पहले तीन महीनों के लिए छूट दी गई—दूसरे हफ्ते 75%, तीसरे हफ्ते 50%, और तीसरे महीने तक 25%। फिर भी, लोग मेट्रो कम चुन रहे हैं। रेडिसन स्क्वायर तक लाइन बढ़ने से स्थिति सुधर सकती है। AICTSL बसों के साथ जोड़ने की योजना भी है।

कमी की वजह किराया या पहुंच?

किराया लागू होना यात्री कमी का बड़ा कारण है। 20-30 रुपये छोटी दूरी के लिए महंगा लगता है। सुपर कॉरिडोर में IT कर्मचारी मेट्रो लेते हैं, मगर आम लोग ऑटो और बस को सस्ता मानते हैं। केवल 5 स्टेशन और 6.3 किमी का रूट सीमित है। स्टेशनों तक पहुंचने में समय और खर्च बढ़ता है। लोग सुविधा और लागत देखकर बस या ऑटो लेते हैं। मेट्रो का दायरा बढ़ाने की जरूरत है।

सुविधाएं और चुनौतियां

मेट्रो में प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स, QR-कोड टिकट, और रियल-टाइम ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं हैं। ट्रेनें एयर-कंडीशंड हैं, दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर स्पेस और दृष्टिबाधितों के लिए ऑडियो सिस्टम है। मगर टिकटिंग अभी मैनुअल है, क्योंकि ऑटोमैटिक सिस्टम की जांच चल रही है। थर्ड रेल और AI-बेस्ड कंट्रोल पर्यावरण-अनुकूल हैं। रूट विस्तार में देरी चुनौती है। रेडिसन स्क्वायर तक लाइन पूरी होने तक बड़ा बदलाव मुश्किल है।

Ronak Namdev
लेखक के बारे में
मैं रौनक नामदेव, एक लेखक जो अपनी कलम से विचारों को साकार करता है। मुझे लगता है कि शब्दों में वो जादू है जो समाज को बदल सकता है, और यही मेरा मकसद है - सही बात को सही ढंग से लोगों तक पहुँचाना। मैंने अपनी शिक्षा DCA, BCA और MCA मे पुर्ण की है, तो तकनीक मेरा आधार है और लेखन मेरा जुनून हैं । मेरे लिए हर कहानी, हर विचार एक मौका है दुनिया को कुछ नया देने का । View all posts by Ronak Namdev
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