इंदौर नगर निगम में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अचानक निगम मुख्यालय पहुंच गए। सुबह करीब साढ़े 11 बजे पहुंचे सैकड़ों कर्मचारियों ने परिसर में ही जमीन पर बैठकर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कर्मचारियों के इस अचानक प्रदर्शन से निगम परिसर में काफी देर तक गहमागहमी और हंगामे का माहौल बना रहा।
सफाई कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग लंबे समय से अटके नियमितीकरण को लागू करना है। कर्मचारियों का कहना है कि वे सालों से अपनी समस्याओं को लेकर महापौर और निगम आयुक्त को आवेदन दे रहे हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। अब समस्याओं का हल न निकलने पर कर्मचारियों ने निगम आयुक्त को पत्र सौंपकर 5 अक्टूबर से पूरे शहर में सफाई काम पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दे दी है।
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मेयर के निर्देशों के बाद भी नहीं बनी बात
बता दें कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने 24 अगस्त को अधिकारियों को सफाईकर्मियों की मांगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसमें कम पढ़े-लिखे कर्मचारियों को भी कोर्ट के आदेश अनुसार चतुर्थ श्रेणी जैसा वेतन देने की बात शामिल थी। साथ ही मई 2007 के बाद भर्ती हुए दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मचारियों को विनियमित करने के लिए शासन को पत्र भेजने के निर्देश भी दिए गए थे।
अनुकंपा नियुक्ति और वेतन पर्ची की भी है मांग
इसके अलावा किसी सफाई मित्र की मौत पर उसके परिवार को तुरंत अनुकंपा नियुक्ति देने और छुट्टियों के पैसे का समय पर भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही हर महीने कर्मचारियों को सैलरी स्लिप देने की बात भी कही गई थी। हालांकि कर्मचारियों का आरोप है कि मेयर के निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिख रहा, जिससे मजबूर होकर उन्हें आंदोलन करना पड़ रहा है।