इंदौर पुलिस कमिश्नरेट में मंगलवार को आयोजित “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान के तहत सामूहिक ई-शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया है। इसमें लाख लाख से अधिक लोगों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भाग लिया। पुलिस कमिश्नरेट के मुताबिक इस जन जागरूकता अभियान ने सहभागिता के मामले में नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है।
युवाओं एवं समाज को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति तथा उसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते हुए नशामुक्त ओर स्वस्थ समाज के निर्माण के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशव्यापी “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0 (Say No To Drugs)” अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में इंदौर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा अभियान के अंतर्गत निरंतर नवाचारों ओर व्यापक जनसहभागिता के माध्यम से विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ई-शपथ कार्यक्रम भी इन्हीं प्रयासों में से एक है।
इंदौर पुलिस ने बनाया नया रिकॉर्ड
पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष 85 हजार लोगों ने इस अभियान में हिस्सा लिया था। जबकि इस बार 1,75,451 लोगों की भागीदारी दर्ज की गई। पुलिस प्रशासन का कहना है कि युवाओं को नशे से दूर रखने और समाज को जागरूक बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
28 जुलाई को इंदौर पुलिस कमिश्नरेट ने एक और स्वर्णिम उपलब्धि अपने नाम दर्ज कराते हुए नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। शहर के विभिन्न स्कूल/ कॉलेजों एवं शैक्षणिक संस्थानों के छात्र-छात्राओं, पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों, पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों, विभिन्न शासकीय एवं निजी संस्थाओं, कॉर्पोरेट कार्यालयों, सामाजिक संगठनों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंजर्स तथा आम नागरिकों सहित एक लाख से अधिक लोगों एक साथ ऑनलाइन माध्यम से नशामुक्ति की ई-शपथ लेकर नशे के विरुद्ध जनजागरूकता का अभूतपूर्व संदेश दिया। ई-शपथ का मुख्य कार्यक्रम पुलिस आयुक्त कार्यालय, पलासिया में आयोजित किया गया।
यह रिकॉर्ड नशे के खिलाफ सामूहिक चेतना का प्रतीक- कमिश्नर संतोष सिंह
पुलिस आयुक्त संतोष सिंह ने कहा कि, “नशे के खिलाफ यह अभियान केवल पुलिस का नहीं बल्कि पूरे समाज का जनआंदोलन है। एक साथ इतने लोगों की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि इंदौर नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “जब समाज विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षण संस्थान, उद्योग जगत, मीडिया और पुलिस एक मंच पर आकर संकल्प लेते हैं, तब बदलाव निश्चित होता है। यह रिकॉर्ड केवल उपलब्धि नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी है और नशे के खिलाफ सामूहिक चेतना का एक प्रतीक है।”






